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जयललिता की महंगी साड़ियां, चप्पलें और ग्लास कोर्ट के पास

सामान की रखवाली के लिए चार पुलिसवाले शिफ्ट में ड्यूटी लगाते हैं

जयललिता की महंगी साड़ियां, चप्पलें और ग्लास कोर्ट के पास
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चेन्नै. तमिनाडु की मुख्यमंत्री रहीं दिवंगत जे जयललिता की सारी संपत्ति कर्नाटक हाईकोर्ट के पास है। गौरतलब है कि जयललिता पर आय से अधिक संपत्ति का केस चल रहा था, जो उनके निधन के बाद खत्म हो सकता है। लेकिन उनसे जुड़ी कीमती चीजें जैसे साड़ी, चप्पलें और सोना-चांदी अब भी कर्नाटक कोर्ट के पास जमा है। AIADMK के वरिष्ठ नेताओं ने उम्मीद जताई है कि सुप्रीम कोर्ट जल्द ही फैसला सुनाकर उस सारे सामान को वापस लौटा देगा जिससे उन्हें एक म्यूजियम बनाकर याद के तौर पर रखा जा सके।
कोर्ट का फैसला जून 2017 में आ सकता है। हालांकि, केस का ट्रायल आगे चल सकता है क्योंकि मामले में एक से ज्यादा लोगों का नाम शामिल है। कर्नाटक के विशेष सार्वजनिक अभियोक्ता ने कहा था कि कर्नाटक सरकार को जयललिता की मौत का एक मेमो सुप्रीम कोर्ट में फाइल करना होगा।
कर्नाटक के एडिशन एडवोकेट ने कहा कि अगर कोर्ट ने आरोपी को दोषी पाया तो जब्त किया गया सारा सामान तमिलनाडु की सरकार को सौंप दिया जाएगा। वहीं अगर आरोप सही नहीं निकले तो सारा सामान तमिलनाडु के सही दावेदार को सौंपा जाएगा। इनकम टैक्स द्वारा 1996 में जब्त किए गए सारे सामान की रखवाली कर्नाटक पुलिस कर रही है।
सारे सामान को दो अलग-अलग जगहों पर रखा गया है। जब्त सामान में 10,500 साड़ी, 750 जोड़ी चप्पड-जूते और 500 शराब के ग्लास हैं। इस सबको शहर के सिविल कोर्ट के पहले फ्लोर पर रखा गया है। सामान की रखवाली के लिए चार पुलिसवाले शिफ्ट में ड्यूटी लगाते हैं। इसके अलावा 21.28 किलो सोना जिसकी कीमत 3.5 करोड़ के आसपास है, 1.250 किलो चांदी का सामान जो 3.12 करोड़ की होगी और 2 करोड़ रुपए के हीरों के अलावा एक चांदी की तलवार भी है। इस सबको किसे दिया जाएगा इसका फैसला सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ही होगा।
इनकम टैक्स विभाग ने 2002 में सारा सामान सरकार को सौंपा था। उस वक्त केस तमिलनाडु से कर्नाटक में शिफ्ट हो गया था।1996 में जयललिता की तरफ से एक अर्जी डाली गई थी कि तमिलनाडु में डीएमके की सरकार होने की वजह से उन्हें उचित न्याय नहीं मिलने का डर है। इस वजह से केस को कर्नाटक में शिफ्ट किया गया था।
एक स्पेशल कोर्ट ने उन्हें और बाकी आरोपियों को सितंबर 2014 में जेल भेज दिया था। फिर कर्नाटक हाई कोर्ट ने फैसले को बदलकर मई 2015 में जयललिता को बाहर कर दिया था। फिर कर्नाटक सरकार ने ही सुप्रीम कोर्ट में अर्जी डाली थी। अब फैसला लंबित है।
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