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तमिलनाडु में जयललिता का फरमान, विश्वविद्यालयों में हिंदी नही पढ़ने देंगी

जयललिता ने विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया कि वे यूजीसी के सकरुलर को लागू नहीं करें

तमिलनाडु में जयललिता का फरमान, विश्वविद्यालयों में हिंदी नही पढ़ने देंगी
चेन्नई. तमिलनाडु राज्य में हिन्दी ‘थोपने’ का अपना विरोध बरकरार रखते हुए तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने बृहस्पतिवार को दो विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया कि वे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के सकरुलर को लागू नहीं करें और कहा कि पूर्व संप्रग सरकार द्वारा किया गया फैसला उसके लिए बाध्यकारी नहीं होगा। मुख्यमंत्री जयललिता ने कहा, ‘इससे, यह स्पष्ट है कि हिन्दी थोपने का प्रयास, खासकर 28 जुलाई 2011 को केंद्रीय हिन्दी समिति की बैठक में लिए गए फैसलों में निहित है।’

मुख्यमंत्री ने यह भी सवाल उठाया कि तब कांग्रेस नीत संप्रग का हिस्सा रही द्रमुक क्यों चुप रही, जबकि अब वह विरोध कर रही है । उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी का रूख दृढ़ है और हिन्दी को गैर हिन्दी भाषी राज्यों पर नहीं थोपा जाना चाहिए । जयललिता ने कहा, ‘मैंने राज्य के मुख्य सचिव को विश्वविद्यालयों को यह सलाह देने को कहा है कि वे यूजीसी को सूचित करें कि जुलाई 2011 में केंद्रीय हिन्दी समिति की बैठक में लिए गए फैसले उनके लिए बाध्यकारी नहीं होंगे ।’

यूजीसी ने विविद्यालयों में हिंदी पढ़ाने का सर्कुलर वापस लिया

यूजीसी ने गुरुवार को अपना वह विवादित सरर्कुलर वापस लेने का फैसला किया जिसमें विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया गया था कि वे स्नातक पाठ्यक्रमों में हिंदी को एक प्राथमिक भाषा के तौर पर पढ़ाएं । यूजीसी के अध्यक्ष वेद प्रकाश ने गुरुवार को कहा कि यूजीसी इस मुद्दे पर शुक्रवार को नए सिरे से एक सर्कुलर जारी करेगा. प्रकाश ने यह बयान जयललिता द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखने के कुछ घंटे बाद दिया है. अपने पत्र में जयललिता ने हिंदी ‘‘थोपने’’ का विरोध करते हुए कहा कि यूजीसी का निर्देश राज्य पर ‘‘बाध्यकारी’’ नहीं है।

नीचे की स्लाइड्स में पढ़िए, क्यों है विवाद -
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