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नोटबंदी: माओवादियों की नजर अब गरीबों के जन धन खातों पर

500 और 1000 के नोटों को यूं अचानक बंद करने से यह संगठन ज्यादा परेशान नहीं है।

नोटबंदी: माओवादियों की नजर अब गरीबों के जन धन खातों पर
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रांची. दो दिन पहले नोटबंदी की सरकार की घोषणा के बाद से सभी लोगों में हलचल सी मच गई है। सभी लोग अपने-अपने पैसों को अपने बैंक खातों में जमा करने लगे हैं। लेकिन इन सबसे दूर माओवादी बेखौफ हैं। सीपीआइ (माओवादी) जोनल और स्पेशल एरिया कमिटी (एसएसी) जो संगठन के रोजमर्रा के खर्च के लिए लेवी जमा करती है, लेकिन 500 और 1000 के नोटों को यूं अचानक बंद करने से यह संगठन ज्यादा परेशान नहीं है।
दरअसल बात यह है कि माओवादियों को उम्मीद है कि झारखंड के दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों के जन धन अकाउंट उन्हें इस परेशानी से बचा लेंगे। वे मान रहे हैं कि इन खातों के जरिए वे 'बेकार' हो चुकी मुद्रा को बदलकर फिर इस्तेमाल में ले आएंगे।
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, माओवादी, जो ठेकेदारों, खनन कंपनियों और उद्योगपतियों से लेवी के रूप में बड़ी संख्या में 500 और 1000 रुपए के नोट लेते हैं, ने अपने काडर को निर्देश दिए हैं कि गांववालों से बात कर जल्द ही कोई कारगर योजना बनाएं। वे ग्रामीणों को अपना समर्थक मान रहे हैं और उन्हें उम्मीद है कि ग्रामीण कमिशन के बदले उनका पैसा अपने जनधन खातों में जमा करवाकर उनकी मदद करेंगे।
बिहार-झारखंड स्पेशल एरिया कमिटी (बीजेएसएसी) के प्रवक्ता गोपालजी ने कहा कि जमा की गई लेवी केंद्रीय समिति को भेज दी गई है, जो अलग-अलग जोनल और स्पेशल एरिया कमिटी को उनके कामकाज के लिए पैसा मुहैया कराती है। उन्होंने कहा, 'जिला और खास तौर पर स्पेशल एरिया कमिटी के पास ज्यादा नकद तो नहीं होता लेकिन जब तक रकम बदली नहीं जाती बैन से समस्या तो होगी।'
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