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भारत का अभिन्न हिस्सा रहेगा जम्मू कश्मीर: उच्चतम न्यायालय

कोर्ट ने कहा कि संविधान के बाहर नहीं है जम्मू कश्मीर।

भारत का अभिन्न हिस्सा रहेगा जम्मू कश्मीर: उच्चतम न्यायालय
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट की इस राय को दरकिनार कर दिया कि संसद को राज्य के लिए कानून बनाने की विधायी शक्ति हासिल नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जम्मू कश्मीर की भारतीय संविधान के बाहर और अपने संविधान के अंतर्गत रत्ती भर भी संप्रभुता नहीं है और उसके नागरिक सबसे पहले भारत के नागरिक हैं। शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘उच्च न्यायालय का फैसला ही गलत अंत से प्रारंभ होता है अतएव वह गलत निष्कर्ष पर भी पहुंच जाता है। यह कहता है कि जम्मू कश्मीर के संविधान में अनुच्छेद पांच के सदंर्भ में राज्य को अपने स्थायी नागरिकों की अचल संपत्तियों के संदर्भ में उनके अधिकारों से जुड़े कानूनों को बनाने का पूर्ण संप्रभु अधिकार है।’’
न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ और न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन की पीठ ने कहा, ‘‘जम्मू कश्मीर को भारतीय संविधान के बाहर और अपने संविधान के तहत रत्ती भर भी संप्रभुता नहीं है। राज्य का संविधान भारत के संविधान के अधीनस्थ है।’’ पीठ ने कहा, ‘‘अतएव, उसके निवासियों का खुद को एक अलग और विशिष्ट वर्ग के रच्च्प में बताना पूरी तरह गलत है। हमें उच्च न्यायालय को यह याद दिलाने की जरूरत है कि जम्मू कश्मीर के निवासी सबसे पहले भारत के नागरिक हैं।’’ शीर्ष अदालत ने वित्तीय आस्तियां प्रतिभूतिकरण एवं पुनर्गठन तथा प्रतिभूति हित प्रवर्तन अधिनियम, 2002 के प्रावधानों को संसद की विधायी क्षमता के अंतर्गत आने का जिक्र करते हुए कहा कि इन्हें जम्मू कश्मीर में लागू किया जा सकता है। शीर्ष अदालत का फैसला उच्च न्यायालय के निर्णय के विरूद्ध भारतीय स्टेट बैंक की अपील पर आया है। उच्च न्यायालय ने कहा था कि वित्तीय आस्तियां प्रतिभूतिकरण एवं पुनर्गठन तथा प्रतिभूति हित प्रवर्तन :एसएआरएफएईएसआइ: अधिनियम का जम्मू कश्मीर के संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम, 1920 से टकराव होगा।
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