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नक्सलियों से लोहा लेने वाले सुब्रमण्यम और वीरप्पन को ढेर करने वाले विजय कुमार जम्मू-कश्मीर में करेंगे शांति बहाल

जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू होने के बाद छत्तीसगढ़ कैडर के वरिष्ठ आईएएस बीवीआर सुब्रह्मण्यम जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव और पूर्व आईपीएस अधिकारी विजय कुमार को राज्यपाल का सलाहकार नियुक्त किया है।

नक्सलियों से लोहा लेने वाले सुब्रमण्यम और वीरप्पन को ढेर करने वाले विजय कुमार जम्मू-कश्मीर में करेंगे शांति बहाल
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गठबंधन सहयोगी पीडीपी से भाजपा की समर्थन वापसी और उसके बाद मुख्यमंत्री के रूप में महबूबा मुफ्ती के इस्तीफे के कारण बुधवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मंजूरी के बाद जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू हो गया। एक दशक में यह चौथा मौका है जब राज्य में राज्यपाल शासन लगा है। इधर, छत्तीसगढ़ कैडर के वरिष्ठ आईएएस बीवीआर सुब्रह्मण्यम जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव और पूर्व आईपीएस अधिकारी विजय कुमार को राज्यपाल का सलाहकार नियुक्त किया है।

आंतरिक मामले के विशेषज्ञ हैं सुब्रमण्यम

आंध्र प्रदेश के 55 वर्षीय अधिकारी बीवीआर सुब्रह्मण्यम छत्तीसगढ़ में अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) हैं। सुब्रह्मण्यम को आंतरिक सुरक्षा मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है। उन्हें नक्सल प्रभावित इलाकों में शांति बहाल करने के लिए खास तौर पर जाना जाता है। वर्ष 2004-2008 के बीच उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के निजी सचिव के तौर पर भी अपनी सेवाएं दी हैं। बस्तर इलाके में बीवीआर सुब्रमण्यम ने मुख्य सचिव रहते हुए 2017 में इस इलाके में 300 नक्सली मारे गए और 1000 से अधिक ने सरेंडर किया।

वीरप्पन को ढेर करने वाले विजय कुमार

वहीं तमिलनाडु काडर के 1975 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे पूर्व आईपीएस अधिकारी विजय कुमार के नेतृत्व वाली टीम ने कुख्यात चंदन तस्कर वीरप्पन को अक्टूबर 2004 में एक मुठभेड़ में मारा गया था। कुमार जंगल में उग्रवाद निरोधक अभियान चलाने में माहिर माने जाते हैं। कुमार 1998-2001 में बीएसएफ के महानिरीक्षक (आईजी) के तौर पर कश्मीर घाटी में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। साल 2010 में छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में नक्सली हमले में सीआरपीएफ के 75 जवानों के शहीद होने के बाद कुमार को इस बल का डीजी बनाया गया था।

कश्मीर में राज्यपाल शासन

राज भवन के एक प्रवक्ता ने श्रीनगर में बताया, भारत के राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने के तुरंत बाद राज्यपाल एनएन वोहरा ने जम्मू-कश्मीर के संविधान की धारा 92 के तहत राज्य में राज्यपाल शासन लागू करने का आदेश दिया। उन्होंने बताया कि राज्यपाल ने मुख्य सचिव बीबी व्यास से उन प्रमुख कार्यों पर चर्चा की जिन्हें आज ही शुरू करके तय समयसीमा में पूरा करना है।

प्रवक्ता ने बताया, राज्य प्रशासनिक मशीनरी तेजी से, प्रभावशाली ढंग से और जवाबदेही से काम करे, इसके लिए उसे मुस्तैद करने के लिए राज्यपाल वरिष्ठ असैन्य और पुलिस अधिकारियों तथा वन एवं अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों से आज बातचीत कर रहे हैं। वोहरा के कार्यकाल में राज्य में पहली बार राज्यपाल शासन वर्ष 2008 में 174 दिन के लिए लगाया गया था, जब गुलाम नबी आजाद के नेतृत्व में कांग्रेस और पीडीपी की गठबंधन सरकार से पीडीपी ने अमरनाथ भूमि विवाद के चलते समर्थन वापस ले लिया था। उमर अब्दुल्ला के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के साथ ही राज्यपाल शासन पांच जनवरी 2009 को समाप्त हुआ था।

राज्यपाल ने ली बैठक

जम्मू-कश्मीर सरकार के प्रमुख का कार्यभार संभालने के बाद राज्यपाल एनएन वोहरा ने सचिवालय में राज्य के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक की। राज्यपाल ने मुख्य सचिव बीबी व्यास से बात की और तय समय के भीतर पूरे किये जाने वाले कार्यों को सूचीबद्ध किया। प्रशासन का प्रभार लेने के लिए सचिवालय पहुंचने पर उनका स्वागत किया गया और गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।

चार दशक में आठवीं बार राज्यपाल शासन लगा

बीते चार दशक में यह आठवां मौका है जब राज्य में राज्यपाल शासन लगाया गया है। वर्ष 2008 से वोहरा के कार्यकाल में चौथी बार राज्य में राज्यपाल शासन लागू किया गया है।

26 मार्च, 1977

शेख अब्दुल्ला की नेशनल कॉन्फ्रेंस से कांग्रेस के समर्थन वापस लेने के बाद 26 मार्च 1977 को यहां पहली बार राज्यपाल शासन लागू हुआ था जो 105 दिन तक चला था। 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से समझौता के बाद यहां नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार बनी थी। चुनाव के बाद 9 जुलाई 1977 को शेख अब्दुल्ला ने दोबारा सत्ता में वापसी की और पांच साल तक शासन किया।

6 मार्च, 1986

6 मार्च 1986 को एक बार फिर कांग्रेस के समर्थन वापस लेने के बाद जम्मू-कश्मीर में गुलाम मोहम्मद शाह की अल्पमत वाली सरकार गिर गई थी। तब दूसरी बार राज्य में केंद्र शासन 246 दिन तक लागू रहा था। गुलाम मोहम्मद शाह खुद भी कुछ विधायकों के साथ मिलकर नेशनल कॉन्फ्रेंस से अलग होकर सीएम बने थे। राज्यपाल शासन के खत्म होने के बाद फारूक अब्दुल्ला ने तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ समझौता कर सरकार बनाई।

19 जनवरी, 1990

जम्मू-कश्मीर में अभी तक का सबसे लंबा राज्यपाल शासन 1990 में लगा था। उस दौरान जगमोहन मल्होत्रा की राज्यपाल के रूप में नियुक्ति के विरोध में फारूक अब्दुल्ला ने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया था। इस वजह से जम्मू-कश्मीर में तीसरी बार राज्यपाल शासन लागू हुआ था। इसके बाद 1996 चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने दोबारा सत्ता में वापसी की थी और फारूक अब्दुल्ला सीएम बने थे।

18 अक्टूबर, 2002

2002 में त्रिशंकु विधानसभा नतीजों के बाद फारूक अब्दुल्ला ने कार्यवाहक सीएम के रूप में सेवाएं देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद राज्य में चौथी बार फिर से राज्यपाल शासन लागू हुआ था जो 15 दिन तक चला था। इसके बाद मुफ्ती मोहम्मद सईद ने कांग्रेस और निर्दलीय विधायकों के साथ गठबंधन कर सरकार बना ली थी।

11 जुलाई 2008

2008 में अमरनाथ जमीन विवाद के दौरान पीडीपी के गुलाम नबी आजाद के नेतृत्व वाली कांग्रेस से समर्थन वापस लेने के बाद पांचवी बार फिर यहां 178 दिनों के लिए राज्यपाल शासन लागू हुआ था। इसके बाद 5 जनवरी 2009 को नेशनल कॉन्फ्रेंस के उमर अब्दुल्ला ने सबसे कम उम्र के सीएम के रूप में शपथ ली थी।

9 जनवरी 2015

2014 चुनाव में हंग असेंबली के चलते उमर अब्दुल्ला को सीएम पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इसके बाद भाजपा ने पीडीपी के साथ चुनाव बाद गठबंधन कर सरकार बनाई थी। मुफ्ती सईद 1 मार्च 2015 को सीएम बने थे।

8 जनवरी 2016

पीडीपी मुखिया और तत्कालीन सीएम मुफ्ती मोहम्मद सईद की मृत्यु के बाद यहां सातवीं बार राज्यपाल शासन लागू हुआ था। उस दौरान भाजपा और पीडीपी ने कुछ समय के लिए सरकार गठन टालने का फैसला किया था। इसके बाद भाजपा ने दोबारा पीडीपी से गठबंधन कर वहां सरकार बनाई और 4 अप्रैल को महबूबा मुफ्ती ने सीएम पद की शपथ ली थी।

आतंकवाद समाप्त हो

केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि राजनाथ सिंह कहा कि केंद्र सरकार चाहती है कि जम्मू कश्मीर में आतंकवाद समाप्त हो और शांति व्यवस्था कायम हो। लक्ष्य केवल एक ही है कि आतंकवाद समाप्त होना चाहिए और कश्मीर में शांति व्यवस्था कायम होनी चाहिए। इसी लक्ष्य को सामने रखकर हमारी सरकार काम करेगी।

विश्वासघात किया

कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि मार्च 2015 में भाजपा और पीडीपी के बीच एक अनैतिक गठबंधन हुआ। पीडीपी ने कश्मीर के लोगों के साथ विश्वासघात किया, भाजपा ने जम्मू के लोगों के साथ विश्वासघात किया। केंद्र की सरकार ने राज्य और पूर देश के साथ विश्वासघात किया।

हसनैन या हुड्डा नए राज्यपाल?

जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल एनएन वोहरा का कार्यकाल इसी महीने खत्म हो रहा है। अगले राज्यपाल के लिए सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल दीपेंद्र हुड्डा और सैयद अता हसनैन के नाम की चर्चा है। सर्जिकल स्ट्राइक के वक्त हुड्डा उत्तरी कमान के कमांडर थे। वहीं, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल हसनैन कश्मीर में सेना की 15वीं कोर के कमांडर रह चुके हैं। पहले कहा जा रहा था कि अमरनाथ यात्रा खत्म होने तक वोहरा राज्यपाल पद पर बने रह सकते हैं। यात्रा 28 जून से 26 अगस्त तक चलेगी।

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