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जामा मस्जिद ब्लास्ट केस: यासीन भटकल के खिलाफ आरोप तय

यह मामला 19 सितंबर 2010 को ऐतिहासिक जामा मस्जिद के पास हुए एक विस्फोट से जुड़ा है।

जामा मस्जिद ब्लास्ट केस: यासीन भटकल के खिलाफ आरोप तय

दिल्ली की एक अदालत ने आज 2010 के जामा मस्जिद बम धमाका मामले में आतंकवादी संगठन इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) के सदस्य यासीन भटकल और 10 अन्य के खिलाफ आरोप तय करने के आदेश दिए।

बहरहाल, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सिद्धार्थ शर्मा ने संगठन के तीन कथित सदस्यों को यह कहते हुए आरोपमुक्त कर दिया कि उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं।

अदालत ने सैयद इस्माइल अफाक, अब्दुस सबूर और रियाज अहमद सईदी को इस मामले में आरोपमुक्त कर दिया। पुलिस ने उनके खिलाफ आरोप-पत्र दायर किया था।

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यह मामला 19 सितंबर 2010 को ऐतिहासिक जामा मस्जिद के पास हुए एक विस्फोट से जुड़ा है। इससे ठीक पहले आईएम के दो संदिग्ध सदस्यों ने उस बस पर फायरिंग की थी जिससे मस्जिद के एक गेट के पास विदेशी सैलानी उतर रहे थे।

आज का आदेश धमाके की वारदात पर आया है। पुलिस ने धमाके के मामले में आईएम के सह-संस्थापक यासीन भटकल सहित संगठन के तीन संदिग्ध सदस्यों के खिलाफ आरोप-पत्र दायर किया था और कहा था कि इन सदस्यों ने 2010 में दिल्ली में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में दूसरे देशों को हिस्सा लेने से हतोत्साहित करने के लिए इस हमले को अंजाम दिया था।

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पुलिस ने यह भी कहा था कि आईएम सदस्यों ने योजना बनाई थी कि जामा मस्जिद के पास मिलने वाले विदेशी सैलानियों पर गोली चलाई जाएगी और वहां एक बम धमाके को अंजाम दिया जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा नुकसान हो।

पुलिस ने दावा किया था कि भटकल ने एक प्रेशर कुकर आईईडी तैयार की थी, जिसे जामा मस्जिद के बाहर खड़ी कार में रखा गया था, और एक विस्फोट हुआ था।

अदालत ने 18 जुलाई को इस बात पर फैसला करने के लिए अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था कि भटकल पर चार अलग-अलग आतंकवादी मामलों में मुकदमा चलाया जाए कि नहीं।

एनआईए की विशेष अदालत ने पिछले साल दिसंबर में 2013 के हैदराबाद बम धमाके के मामले में भटकल को मौत की सजा सुनाई थी। हैदराबाद बम धमाके के मामले में 18 लोग मारे गए थे।

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