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बच्चे को जन्म देने या अबॉर्शन कराने का फैसला खुद लें महिलाएं, ये उनका हक है: SC

जज ने कहा कि इस मामलें में पुरुषों को अपने फैसले नहीं थोपने चाहिए।

बच्चे को जन्म देने या अबॉर्शन कराने का फैसला खुद लें महिलाएं, ये उनका हक है: SC
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नई दिल्ली. देश की सर्वोच्च अदालत के एक जज ने महिलाओं के हक में एक बार फिर से पूरे भारतीय समाज को फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि महिलाओें को उनकी मर्जी से गर्भवती होने का अधिकार है। ये महिलाओं की मर्जी है कि वह प्रेंगनेंट हो या अबॉर्शन करवाए।
सुप्रीम कोर्ट के जज न्यायमू्र्ती एके सिकरी ने शनिवार को कहा कि, बच्चों को जन्म देना, अबॉर्शन कराना या गर्भ रोकना या न रोकना जैसे फैसले औरतों के खुद के होने चाहिए। इस मामलें में पुरुषों को अपन फैसले नहीं थोपने चाहिए। जी न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक न्यायमूर्ती सिकरी ने महिलाओं के प्रजनन अधिकार की स्थिति, और ऐसे मामलों में घर के पुरुषों और परिवारों की दखलअंदाजी के मामलों पर बोल रहे थे।
जज ने कहा कि, देश में जब हम बच्चे पैदा करने की बात करते हैं तो महिलाओ के फैसले इसमें कम ही आते हैं। घर के बड़े या पति इस मामले में दखलअंदाजी करते हैं। यह बहुत बड़ दुर्भीग्य है कि 21वीं सदी और आज के आधुनिक टाइम में भी हम महिलाओं को मानवता और आजादी नहीं दे पाए हैं।
न्यायमूर्ती सिकरी यहां जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी की भारतीय अदालतों में प्रजनन के अधिकार पर आयोजित एक संगोष्ठी में बोल रहे थे। जज ने कहा कि यह कड़वा सच है कि प्रजनन अधिकार जो वाकई एक मानव अधिकार है मानवीय मर्यादा पर आधारित है। यह सभी अधिकार महिला के और अधिकारों की तरह जुड़े हुए है। इसमें पति या परिवार की पसंद या और दूसरे बड़ों के बोलने का क्या जरुरत है।
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