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उम्र और स्थिति के बावजूद बार के सदस्यों का सम्मान करना जजों के कर्तव्य- CJI दीपक मिश्रा

में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट एक है और बार हमें पोषित करता है।

उम्र और स्थिति के बावजूद बार के सदस्यों का सम्मान करना जजों के कर्तव्य- CJI दीपक मिश्रा
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दिल्ली में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट एक है और बार हमें पोषित करता है। जजों का कर्तव्य है कि वे अपनी उम्र और स्थिति के बावजूद बार के सदस्यों का सम्मान करें। मैं व्यक्तिगत रुप से ऐसा महसूस करता हूं। मेरा विरोधाभास करने के लिए आपका स्वागत है।

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जस्टिस दीपक मिश्रा का अब तक का करियर

63 साल के जस्टिस मिश्र की नियुक्ति वरिष्ठता के आधार पर हुई थी। वह 13 महीने के कार्यकाल के बाद 2 अक्टूबर 2018 को रिटायर होंगे।

साल 1953 में जन्मे मिश्र ने फरवरी 1977 में वकील के तौर पर करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने लंबे समय तक उड़ीसा हाई कोर्ट और सर्विस ट्रिब्यूनल में संवैधानिक, सिविल, क्रिमिनल, राजस्व, सर्विस और सेल्स टैक्स समेत कई मामलों में वकालत की।
साल 1996 में वो उड़ीसा हाई कोर्ट में एडिशनल जज के तौर पर नियुक्त हुए और अगले साल उनका तबादला मध्य प्रदेश हो गया। साल 1997 खत्म होते-होते वह स्थायी जज बन गए।
23 दिसंबर, 2009 को जस्टिस मिश्र ने पटना हाई कोर्ट के चीफ़ जस्टिस का कार्यभार संभाला और 24 मई, 2010 को वह दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ़ जस्टिस बन गए। 10 अक्टूबर, 2011 को उनका प्रमोशन हुआ और वह सुप्रीम कोर्ट के जज बन गए।

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