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ISRO करेगा केरोसीन का ईंधन की तरह इस्तेमाल

दरअसल केरोसीन आयल दूसरे अन्य ईंधन की अपेक्षा ज्यादा इको-फ्रेंडली होता है।

ISRO करेगा केरोसीन का ईंधन की तरह इस्तेमाल
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इसरो ने देश के सबसे वजनी रॉकेट GSLV Mk III के ऐतिहासिक लॉन्च के बाद एक ख़ास तरह का सेमी-क्रायोजेनिक इंजन बनाने जा रहा है जिसमें ईंधन के रूप में केरोसीन का प्रयोग होगा।
दरअसल केरोसीन आयल दूसरे अन्य ईंधन की अपेक्षा ज्यादा इको-फ्रेंडली होता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, प्लान के अनुसार अगर सब कुछ ठीक रहा तो इसरो इस सेमी-क्रायोजेनिक इंजन का फ्लाइट टेस्ट 2021 में करेगा।
दरअसल इसरो ने ये निर्णय इस लिए लिया है क्यों कि रॉकेट लॉन्च के दौरान इस सेमी-क्रायोजेनिक इंजन के इस्तेमाल का एक फायदा यह है कि यह रिफाइंड केरोसीन का इस्तेमाल करता है, जो लिक्विड ईंधन की अपेक्षा हल्का होता है।
और इसकी ख़ास बात यह है कि इसे सामान्य तापमान पर भी स्टोर किया जा सकता है। हाल में इसरो ऑक्सीजन और लिक्विड हाइड्रोजन के मिश्रण को ईंधन के रूप में प्रयोग करता था, जिसका वजह केरोसीन से ज्यादा होता था और इसे -253 डिग्री तापमान पर स्टोर करना पड़ता है।
विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर के डायरेक्टर डॉ के सिवन ने जानकारी दी, 'ईंधन के तौर पर पारंपरिक रूप से इस्तेमाल होने वाले लिक्विड हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के मिश्रण के मुकाबले केरोसीन हल्का होता है। यह रॉकेट लॉन्च के दौरान अपेक्षाकृत ज्यादा शक्तिशाली थ्रस्ट उत्पन्न करता है।'
उन्होंने बताया, 'केरोसीन कम जगह लेता है और इस वजह से इंजन में ज्यादा फ्यूल डाला जा सकता है। इसके इस्तेमाल का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि रॉकेट के जरिए लॉन्च होने वाले पेलोड की क्षमता चार टन से बढ़ाकर 6 टन हो जाएगी।'
उन्होंने बताया, 'केरोसीन से चलने वाले इंजन से लैस रॉकेट के जरिए ज्यादा वजनी सैटलाइट स्पेस में भेजे जा सकेंगे। दूसरे ग्रहों और सुदूर अंतरिक्ष के मिशनों में इनका इस्तेमाल किया जा सकेगा।'

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