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इसरो की मदद के बिना संभव नहीं था पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक करना

यह पहली बार नहीं था कि जब इसरो ने सेना को तस्वीरें उपलब्ध कराई हो

इसरो की मदद के बिना संभव नहीं था पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक करना
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नई दिल्ली. भारतीय सेना द्वारा किया गया पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक बिना इसरो के मदद के संभव नहीं था। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक इस हमले से पहले सेना ने इसरो की मदद ली गई थी। पहली बार आर्मी के किसी बड़े ऑपरेशन के लिए कार्टोसैट सैटलाइट्स का इस्तेमाल किया गया है। आखिरी बार इस साल के जून में कार्टोसैट सैटलाइट लॉन्च की गई थी। इसरो के सूत्रों के मुताबिक, लाइन ऑफ कंट्रोल पर किए गए सर्जिकल अटैक में आर्मी को हाई रेजॉल्यूशन की तस्वीरों से बड़ी मदद मिली थी।

हालाकि कि यह पहली बार नहीं था कि जब इसरो ने सेना को तस्वीरें उपलब्ध कराई हो, इससे पहले भी कई बार उन्हें इस तरह की तस्वीरें उपलब्ध कराई गई हैं। इसरो के एक सूत्र ने बताया कि बीते सप्ताह में हमने किसी खास दिन कोई खास तस्वीर भेजी थी। कार्टोसैट इमेज इसी उद्देश्य के लिए होती है और आर्मी ने इनका इस्तेमाल किया है।

इसरो और रक्षा मंत्रालय दोनों ने कार्टोसैट परिवार के सैटलाइट के इस्तेमाल पर चुप्पी साध रखी है। इन सैटलाइट को एक्सपर्ट भारत की 'आइ इन द स्काई' कहते हैं। कार्टोसैट-2C से भारतीय सेना का सर्विलांस यानी निगरानी तंत्र और मजबूत हो गया है। यह सेना को 0.65 मीटर्स की हाई रेजॉल्यूशन तस्वीरें उपलब्ध करा रहा है जोकि पहले की तुलना में काफी बेहतर रेजॉल्यूशन है।

कार्टोसैट ने सेना को एरिया ऑफ इंट्रेस्ट बेस्ड तस्वीरें उपलब्ध कराईं। एक सूत्र ने बताया, सेना के अनुरोध पर एरिया ऑफ इंट्रेस्ट को कवर करते हुए एक पॉलिगॉन में (सभी इलाके एक ही सर्कल में) करते हुए एक और एक से ज्यादा तस्वीरें भेजी गईं।

हैदराबाद स्थित नैशनल रिमोट सेंसिंगसेंटर के मुताबिक, एरिया ऑफ इंट्रेस्ट प्रॉडक्ट्स दो तरह के होते हैं- स्टैंडर्ड और प्रेसिशन बेस्ड ऑर्थो (जहां अंतरिक्ष से ली गई तस्वीरों को एक यूनिफॉर्म स्केल पर सुधारा जाता है। इन दोनों का ही इस्तेमाल सेना करती हैं। ऑर्थो से सही की गई तस्वीरों में क्षेत्रीय अस्पष्टता और कैमरे के टिल्ट प्रभाव को दूर कर दिया जाता है।

यह सैटलाइट केवल एरिया ऑफ इंट्रेस्ट की तस्वीरें ही नहीं खींचती है बल्कि अंतरिक्ष से संवेदनशील इलाकों का विडियो भी रेकॉर्ड कर भेजती है।
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