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अब निपटेगा कावेरी विवाद, इजरायल फार्मूले से होगा समाधान

तमिलनाडु व कर्नाटक में कावेरी जल बंटवारे पर जारी तकरार

अब निपटेगा कावेरी विवाद, इजरायल फार्मूले से होगा समाधान
नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट के आदेश से कावेरी नदी के जल बंटवारे के मुद्दे पर बढ़ी कर्नाटक और तमिलनाडु की तकरार में केंद्र सरकार भी लगातार इस विवाद को सुलझाने का प्रयास कर रही है। इसी बीच सरकार इस विवाद को सुलझाने में इजरायल में अपनाए जा रहे फार्मूेले का इस्तेमाल करने पर भी विचार कर रही है, जिसे कारगर माना जा रहा है। कर्नाटक ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ने में असमर्थता जताते हुए उस आदेश को वापस लेने की गुहार लगाई है, जिसमें कर्नाटक को पानी छोड़ने की सीमा तय करके जल की मात्रा तय की गई है।
केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के सचिव शशि शेखर की अध्यक्षता वाली कावेरी निगरानी समिति की बैठक में भी कावेरी जल बंटवारे को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु में सुलह कराने के लिए लगातार प्रयास चल रहे है। गौरतलब है कि पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कर्नाटक में हिंसा भड़क गई थी। किसानों के विरोध के साथ ही कर्नाटक विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित कर कहा गया कि कावेरी का पानी सिर्फ पीने के लिए इस्तेमाल होना चाहिए।
ऐसे में सरकार को जल विशेषज्ञों ने इजरायल के विचारों के तहत सुलझाने का सुझाव दिया है। यही नहीं इसके लिए स्वयं इजरायली विशेषज्ञों ने कावेरी जल का विवाद सुलझाने के लिए दिये सुझाव में कहा कि यदि दोनों राज्यों को अपने यहां पारंपरिक खेती की जगह कम पानी की खपत वाली खेती करने की तकनीक अपनाएं तो इस तकरार में कमी लाई जा सकती है। इजरायल को इस बात का भी संज्ञान है कि कर्नाटक में गन्ने तथा तमिलनाडु के किसान धान की खेती करते हैं। इन दोनों फसलों में पानी की खपत ज्यादा होती है। इसलिए इजरायली विशेषज्ञों का सुझाव है कि दोनों राज्यों के किसानों को ज्वार की खेती पर बल देना चाहिए, क्योंकि इसमें पानी की खपत कम होती है।
छिड़काव सिंचाई पर बल
जल संसाधन मंत्रालय को इजरायली ने इस विवाद को सुलझाने के लिए दोनों राज्यों के किसानों को सिंचाई की पारंपरिक प्रणाली के बजाए ड्रिप इरीगेशन के लिए प्रोत्साहित किया जाए तो पानी की कम आवश्यकता पडेगी। वैसे भी भारत सिंचाई के लिए इजरायल की तकनीक अपनाने पर विचार कर रहा है। ऐसे में इजरायल में पानी के संकट को दूर करने के लिए अपनाए गये फार्मूलों को भारत भी अपनाने के लिए जागरूकता अभियान चला रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इजरायल जैसी आधुनिक तकनीक से जल संबन्धी परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाए तो देश में चल रही राज्यों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर विवादों में भी कमी आएगी। दरअसल इजरायल की ऐसी आधुनिक तकनीक को अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित देश भी अपना रहे हैं।

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