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ऐसे हैं भारत - इज़राइल के संबंध, जानिए बेंजामिन नेतन्याहू की भारत यात्रा के मायने

शिखर वार्ता के बाद भारत और इज़राइल के आपसी संबंध नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया है।

ऐसे हैं भारत - इज़राइल के संबंध, जानिए बेंजामिन नेतन्याहू की भारत यात्रा के मायने
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शिखर वार्ता के बाद भारत और इज़राइल के आपसी संबंध नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया है। दोनों देशों के बीच नौ समझौते दर्शाते हैं कि दोनों अपने 25 साल के कूटनीतिक रिश्तों को सहयोग के नए शिखर तक ले जाना चाहते हैं। इज़राइल ी प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने जिस उदारता से क्रांतिकारी नेता बताते हुए पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ की है, उससे साफ है कि इज़राइल भारत के साथ सहज है और अपने संबंधों को और मजबूत करना चाहते हैं।

नेतन्याहू ने कहा कि हमारे हजारों साल की साझा विरासत में ऐतिहासिक है कि मेरे खास मित्र पीएम मोदी इजरायल का दौरा करने वाले पहले प्रधानमंत्री हैं। इज़राइल के पास कृषि, पेयजल, रक्षा व सीमा सुरक्षा आदि क्षेत्र में उच्च सतर की तकनीक है। भारत को अपनी बड़ी आबादी की खाद्य व स्वच्छ पेयजल की जरूरत पूरी करनी है। इसके साथ ही भारत पाकिस्तान व चीन सीमा को भी सुरक्षित करना चाहता है।

इन तीनों ही क्षेत्र में भारत इज़राइल के अनुभवों का लाभ ले सकता है। इज़राइल के पास उन्नत कृषि, व सिंचाई की तकनीक है, समुद्र के खारा पानी को कम लागत में पीने लायक बनाने की तकनीक है और सीमा पर मानव रहित लेजर गाइडेड स्मार्ट बाड़ है। इज़राइल अपनी तकनीकों के लिए भारत के विशाल बाजार व मेनपावर का फायदा उठाना चाहता है। कृषि, सिंचाई, रक्षा क्षेत्र में दोनों देश पहले से ही सहयोगी हैं।

अब दोनों देशों ने साइबर सुरक्षा, तेल और प्राकृतिक गैस, स्टार्ट अप इंडिया, रक्षा, कृषि तकनीक, खारे पाने को साफ करने की तकनीक, सीमा को सुरक्षित करने के लिए स्मार्ट बाड़, नागरिक उड्डयन, अंतरिक्ष शोध, औद्योगिक रिसर्च, इजरायल में फिल्मों की शूटिंग को प्रोत्साहन देने आदि क्षेत्र में अहम समझौता किया है। भारत और इजरायल के बीच पहली बार तेल और गैस क्षेत्र में निवेश करार हुआ।

इजरायल रिन्यूवेबल एनर्जी में भारत कंपनियों को उन्नत तकनीक देने को लेकर समझौता हुआ है। इससे साफ है कि दोनों देशों ने अपने सहयोग के फलक को और विस्तार दिया है। इज़राइल के प्रधानमंत्री का कहना कि मुंबई हमले के मास्टर माइंड हाफिज सईद को नहीं छोड़ेंगे, भारत के प्रति इज़राइल के सहयोग का संकेत है। दोनों देशों ने आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ने का ऐलान किया है।

दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने कहा कि भारत और इज़राइल आतंकवाद के खिलाफ लड़ते रहे हैं, कभी हार नहीं मानी है और आगे भी लड़ते रहेंगे। इज़राइल अरब आतंकवाद से पीड़ित रहा है तो भारत पाक प्रायोजित आतंकवाद से। भारत विदेशी शत्रुओं की योजना को विफल करने के लिए इज़राइल की खुफिया एजेंसी मोसाद की मदद ले सकता है। मोसाद और रॉ सहयोगी के तौर पर काम करते दिखाई दे सकते हैं।

कुछ मौकों पर मोसाद ने भारत को सहयोग भी किया है। पश्चिम एशिया में इज़राइल भारत का अहम सहयोगी साबित हो सकता है। हालांकि भारत को फिलीस्तीन, ईरान के साथ अपने रिश्तों को संतुलन के साथ जारी रखना होगा। इज़राइल के फिलीस्तीन, ईरान के साथ संबंध अच्छे नहीं हैं। भारत के अधिकांश अरब व खाड़ी देशों के साथ संबंध अच्छे हैं। इज़राइल कूटनीतिक रूप से परिपक्व देश है,

इसका परिचय उसने यूएन में विरोध में वोटिंग के बावजूद भारत के साथ दोस्ती बढ़ाने के रूप में दिया है, इससे भारत को भी वन टू वन अपने कूटनीतिक रिश्तों को मजबूत करने में मदद मिलेगी। सांस्कृतिक रूप से भी भारत और इज़राइल बेहद करीब है। यहूदी समुदाय चैन से भारत में 2000 साल से सुरक्षित रह रहे हैं। बेजामिन नेतन्याहू ने इसका जिक्र भी किया। उन्होंने कहा कि विश्व के दूसरे देशों में यहूदी समुदाय को जैसे अलग-थलग किया गया,

भारत में ऐसा कभी नहीं हुआ। भारत के यहूदियों में कभी अलगाव की भावना नहीं आई। इज़राइल महात्मा गांधी के अहिंसा दर्शन का भी प्रशंसक है। अच्छी बात है कि इस वक्त भारत और इज़राइल अपने-अपने आवाम की तरक्की के लिए साथ मिलकर आगे बढ़ना चाहते हैं। दोनों देश निवेश और सहयोग बढ़ा कर एक-दूसरे की जरूरत पूरी कर सकते हैं। उम्मीद है दोनों देशों का 25 साल का रिश्ता सहयोग के उच्चतम शिखर तक पहुंचेगा। बेंजामिन की इस यात्रा से कूटनीति का नया अध्याय शुरू होगा।

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