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मुसलमानों को आतंकी कहने वाले ट्रंप को उड़ाना है: आइसिस

आइसिस के आतंकियों ने डोनाल्ड ट्रंप को जान से मारने की धमकी दी है।

मुसलमानों को आतंकी कहने वाले ट्रंप को उड़ाना है: आइसिस
वाशिंगटन. इस्लामिक स्टेट के जेहादियों ने अमेरिका को धमकी दी है। धमकी आईएस ने एक वीडियो पैगाम के जरिए अमेरिका और पश्चिमी देशों तक पहुंचाई है। इसमें कहा गया है कि जिस शख्स ने मुसलमानों को भला बुरा कहा उसे व्हाइटहाउस में घुसने नहीं देंगे। आतंकियों का सीधा मतलब डोनाल्ड ट्रंप से है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को आइसिस के आतंकियों ने जान से मारने की धमकी दी है। उन्होंने इस धमकी भरे खत पर ट्रंप का नाम लिखा है। यानी आईएस का दावा है कि जिस दिन डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे उसी दिन अमेरिका पर आतंकी हमला होगा। बग़दादी के आतंकी अमेरिका में तबाही मचाने का खौफनाक इरादा अंजाम तक पहुंचाने की कोशिश करेंगे। आइसिस का कहना है कि इस दिन को अमेरिका के इतिहास में खूनी शुक्रवार के तौर पर याद रखा जाएगा। ऐसा इस्लामिक स्टेट के जेहादियों ने दावा किया है।
वीडियो में आईएस आतंकवादी कहता है कि, तुमने शुरुआत की और हम व्हाइट हाउस पर हमले के साथ इसका अंत करेंगे। हम व्हाइट हाउस को उड़ा देंगे, जिस तरह से हमने इराक में बुतों को तबाह किया, ठीक उसी तरह हम व्हाइट हाउस को भी तबाह कर देंगे और इस काम के लिए दिन भी मुकर्रर हो चुका है और तारीख भी तय है। जिस रोज इस्लाम का दुश्मन डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति बनेगा हम उसे खत्म कर देंगे। हम उसे उस गद्दी पर नहीं बैठने देंगे, जिस पर बैठकर वो इस्लाम के खिलाफ कोई भी फरमान जारी कर सके।
आईएस ने इससे पहले भी वीडियो जारी करके न्यूयॉर्क सिटी पर भी हमले की धमकी दी थी। हालांकि, अभी तक इन धमकी भरे वीडियो को लेकर अमेरिका की किसी भी एजेंसी ने कोई बात जाहिर नहीं की, लेकिन ये बात भी करीब-करीब सामने आ चुकी है कि आईएस के इन धमकी भरे अल्फाजों को अमेरिकी खुफिया एजेंसियां पूरी तरह से नज़रअंदाज करने के मूड में कतई नहीं हैं। जिस वीडियो में इस्लामिक स्टेट के जेहादियों ने कहा है कि वो अबकी बार अमेरिका की धरती पर आकर हमला करेंगे और उसे खून से नहला देंगे। उस वीडियो की भाषा तो अरबी है, लेकिन उसमें इंग्लिश सबटाइटिल मौजूद हैं।
वीडियो में आतंकियों ने ओहायो की उस वारदात का भी जिक्र किया है जिसमें ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी में एक छात्र ने खूनखराबा किया था। इसमें नौ लोगों को गोली लगी थी। बाद में उस सोमालियाई शरणार्थी की पहचान 18 साल के अब्दुल रज्ज़ाक अली अरतन के तौर पर हुई थी।
साभार- Heavy.com
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