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''अफ्सपा'' के खिलाफ लड़ाई नहीं छोड़ी, सिर्फ रास्ता बदला है: इरोम

इरोम का एक मात्र एजेंडा मणिपुर से अफस्पा कानून को हटाना है।

अफ्सपा के खिलाफ लड़ाई नहीं छोड़ी, सिर्फ रास्ता बदला है: इरोम
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इंफाल. मणिपुर से पहली बार चुनावी मैदान में खड़ी हो रही इरोम शर्मिला ने रविवार को कहा कि 'अफस्पा' कानून के खिलाफ अपनी लड़ाई नहीं छोड़ी है। इरोम ने अफ्सपा का संमर्थन करने वाले लोगो पर आरोप लगाते हुए कहा कि ये लोग 16 साल लंबे अनशन के दौरान उनकी शहादत चाहते थे। सामाजिक कार्यकर्ता इरोम पिछले 16 सालों से विवादित अफस्पा कानून के खिलाफ अनशन पर थी।
बता दे कि 2 नवम्बर 2000 को इंफाल में 10 लोगो की हत्या हो गई थी जिनमे एक राष्ट्रीय वीरता पदक विजेता लड़की भी थी। इरोम इसी के खिलाफ पिछले 16 सालो से अनशन कर रही थी, लेकिन अब उन्होंने अनशन का रास्ता छोड़ कर राजनीति का रास्ता चुन लिया है।
इरोम ने पीपल्स रीसर्जेंस एंड जस्टिस एलांयस (पीआरजेए) नाम से एक नई राजनीतिक पार्टी का गठन किया है। उन्होंने मार्च में होने वाले विधानसभा चुनाव लड़ने का फैसला भी किया है। इरोम की पार्टी का एक मात्र एजेंडा मणिपुर से अफस्पा कानून को हटाना है। उन्होंने कहा कि अगर उनकी पार्टी सत्ता मे आई तो अफस्पा कानून को खत्म करने का प्रयास करेंगी। हालांकि इरोम ने चुनाव मे सिर्फ तीन ही उम्मीदवार उतारे है। इरोम खुद थोबल सीट से मणिपुर के मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह और भाजपा के एल. बशंता सिंह के खिलाफ चुनाव मैदान में है।
इंडिया टुडे के मुताबिक इरोम ने कहा कि अगर पीआरजेए चुनाव हार भी जाए तब भी हम अफ्सपा के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। हम राजनीति में रहेंगे और अगला संसदीय चुनाव भी लड़ेंगे। उन्होंने अफ्सपा को मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन करने वाला कानून बताया है।
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