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नाबालिग मुर्तजा को सजा-ए-मौत पर झुकी सरकार, जानें क्या है मामला

सन 2011 में जब दुनिया के कई देशों में राजतंत्र, तानाशाही और शोषण के विरोध में आंदोलन करके उन्हें सत्ता से बेदखल किया जा रहा था उसी समय सऊदी अरब में भी तानाशाही के खिलाफ लोग सड़क पर उतरे थे। पुलिस ने इस आंदोलन में 17 साल के अली कुरेरिस नाम के युवक को गोली मार मौत के घाट उतार दिया। अली कुरेसिस के 10 वर्षीय भाई मुर्तजा कुरैशी ने अपने भाई को खोने के बाद सरकार के खिलाफ आंदोलन करने की ठानी...

नाबालिग मुर्तजा को सजा-ए-मौत पर झुकी सरकार, जानें क्या है मामलाMurtaza Qureshi

सऊदी अरब के जांबाज किशोर मुर्तजा कुरैशी (Murtaja Qureshi) को अब फांसी की सजा नहीं दी जाएगी। 18 साल के मुर्तजा के पक्ष में माताएं सदियों की बंदिशे तोड़कर सड़क पर निकली। सिया समुदाय ने विरोध के स्वर को सरकार तक पहुंचाया और नतीजा ये हुआ कि मुर्तजा कुरैशी को 2022 में जेल से छोड़ दिया जाएगा।

मुर्तजा कुरैशी को सजा-ए-मौत का फरमान सुनाने पर न सिर्फ सऊदी अरब को लोगों का विरोध झेलना पड़ा बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उसकी किरकिरी हुई। दुनिया के तमाम बुद्धजीवियों ने सऊदी अरब के कानून की निंदा की। चारो तरफ से दबाव के बाद आखिर मौजूदा सरकार को पांव पीछे करने पड़े।

सन 2011 में जब दुनिया के कई देशों में राजतंत्र, तानाशाही और शोषण के विरोध में आंदोलन करके उन्हें सत्ता से बेदखल किया जा रहा था उसी समय सऊदी अरब में भी तानाशाही के खिलाफ लोग सड़क पर उतरे थे। पुलिस ने इस आंदोलन में 17 साल के अली कुरेरिस नाम के युवक को गोली मार मौत के घाट उतार दिया।

अली कुरेसिस के 10 वर्षीय भाई मुर्तजा कुरैशी ने अपने भाई को खोने के बाद सरकार के खिलाफ आंदोलन करने की ठानी, अपने साथियों को इकट्ठा किया। सरकार के खिलाफ विरोध करता, जगह जगह पर्चे चिपकाता। मुर्तजा कुरैशी देश में जनतंत्र की मांग कर रहे थे। वह राजतंत्र के सख्त खिलाफ थे।

मुर्तजा जब 14 साल के थे तो उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और 4 साल तक सॉलिटेरी सेल में रखा गया जहां उन्हें किसी से मिलने की अनुमति नहीं थी। मुर्तजा पर सरकार विरोधी प्रदर्शन, आतंकी संगठन से जुड़ने व सुरक्षा बलों पर फायरिंग का आरोप लगा। आरोपो को मनवाने के लिए मुर्तजा को जमकर पीटा गया।

सऊदी अरब के कानून में नाबालिग को फांसी नहीं दी जा सकती इसलिए मुर्तजा के बालिक होने का इंतजार किया जाता रहा और वह 2019 में जैसे ही 18 साल का हुआ कोर्ट में पेश किया गया और सरकारी वकील ने मुर्तजा के लिए फांसी की मांग की और तानाशाही सरकार ने सजा-ए-मौत की सजा सुना दी।

मृत्युदंड की खबर का पता चलते ही देश में उबाल आ गया। लोग सड़क पर उतर आए। एमनेस्टी इंटरनेशनल सहित कई देशों ने सऊदी अरब से मृत्युदंड रद्द करने की अपील की। पहले तो सरकार ने मना कर दिया पर दुनिया भर से पड़े दबाव के कारण उसे झुकना पड़ा और मुर्तजा को 2022 तक कैद में रखने के बाद छोड़ने का फैसला सुनाना पड़ा।

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