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राजनाथ सिंह चीन और पाकिस्तान को सख्त संदेश देने ईरान पहुंचे

रूस दौरे में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मध्य एशियाई देशों ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान और कजाकिस्तान के रक्षामंत्रियों के साथ भी द्विपक्षीय संबंधों और रक्षा समझौतों पर चर्चा की और इन देशों के साथ मजबूत व्यापारिक, आर्थिक और सांस्कृतिक रिश्तों की वकालत की।

राजनाथ सिंह चीन और पाकिस्तान को सख्त संदेश देने ईरान पहुंचे
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राजनाथ सिंह, फ़ोटो एएनआई

भारत और चीन के बीच जारी तनाव के बीच रूस का दौरा खत्म कर लौट रहे भारत के केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अचानक ईरान पहुंच गए हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्वोत्तर में चीन और पश्चिमी बॉर्डर पर पाकिस्तान के नापाक मंसूबों के कारण रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की ईरान यात्रा बहुत अहम मानी जा रही है। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अपने ट्विटर एकाउंट से ट्वीट करते हुए लिखा, मैं ईरान के रक्षा मंत्री ब्रिगेडियर जनरल आमिर हतामी से मुलाकात करूंगा।

रूस दौरे में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मध्य एशियाई देशों ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान और कजाकिस्तान के रक्षामंत्रियों के साथ भी द्विपक्षीय संबंधों और रक्षा समझौतों पर चर्चा की और इन देशों के साथ मजबूत व्यापारिक, आर्थिक और सांस्कृतिक रिश्तों की वकालत की। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने ट्विटर एकाउंट से ट्वीट करते हुए बताया कि उज्बेकिस्तान के रक्षा मंत्री मेजर जनरल कुरबानोव बखोदीर नीजमोविच के साथ मॉस्को में शानदार बैठक हुई है। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में रक्षा सहयोग एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।

राजनाथ सिंह ने एक अन्य ट्वीट में लिखा, कजाकिस्तान के रक्षा मंत्री लेफ्टिनेंट जनरल नुरलान येरमेकबायेव के साथ सार्थक बातचीत हुई है। हमने भारत-कजाकिस्तान रक्षा सहयोग को और रफ्तार देने के तरीकों पर बातचीत की है। इसके अलावा उन्होंने एक और ट्वीट करते हुए लिखा ताजिकिस्तान के रक्षामंत्री कर्नल जनरल शेरली मिरजो के साथ मॉस्को में हुई सार्थक मुलाकात में रक्षा संबंधों समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई।

बता दें कि एससीओ के आठ सदस्य देशों में भारत, कजाकिस्तान, चीन, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान हैं। एससीओ का लक्ष्य क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा कायम रखना है। भारत साल 2017 में इस संगठन का सदस्य बना था।

आपको बताते चलें कि वर्तमान में ईरान और अमेरिका के बीच रिश्ते अच्छे नहीं चल रहे हैं। अमेरिकी दबाव के बावजूद भारत और ईरान के बीच संबंधों पर कोई असर नहीं पड़ा है। केंद्र की मोदी सरकार साल 2014 से लगातार ईरान को अहम सहयोगी मानती रही है।

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