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Modi In Japan: जापान में बोले पीएम मोदी, 8 सालों में आम लोगों का भरोसा बढ़ा है, खादी बन रही ग्लोबल

क्वाड समिट (Quad Summit) में शामिल होने से पहले पीएम मोदी ने टोक्यो में भारतीय समुदाय के लोगों को संबोधित किया।

Modi In Japan: जापान में बोले पीएम मोदी, 8 सालों में आम लोगों का भरोसा बढ़ा है, खादी बन रही ग्लोबल
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पीएम नरेंद्र मोदी (PM modi) जापान (Japan) में क्वाड समिट (Quad Summit) में शामिल होने से पहले उन्होंने टोक्यो में भारतीय समुदाय के लोगों को संबोधित किया। जहां उन्होंने भारत के बढ़ते प्रभाव और डिजिट बनते भारत की तारीफ की। पीएम मोदी ने कहा कि भारत-जापान स्वाभाविक साझेदार हैं। संबंध अंतरंगता, आध्यात्मिकता, सहयोग और अपनेपन का है।

भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारतीय हमारी 'कर्मभूमि' से पूरे दिल से जुड़ते हैं लेकिन हमारी 'मातृभूमि' के लिए प्यार कभी कम नहीं होता। हम अपनी मातृभूमि से दूर नहीं रह सकते। यह हमारी सबसे बड़ी ताकत में से एक है। शिकागो जाने से पहले स्वामी विवेकानंद जापान आए और देश ने उनके दिमाग पर एक बड़ी छाप छोड़ी।

पीएम मोदी ने आगे कहा कि विवेकानंद अपने ऐतिहासिक भाषण के लिए शिकागो जाने से पहले जापान आ चुके थे। उन्होंने जापान के मन पर गहरी छाप छोड़ी। उन्होंने जापान के लोगों की देशभक्ति, जापान के लोगों के विश्वास, स्वच्छता के लिए जापान के लोगों की जागरूकता की खुलेआम प्रशंसा की थी। भगवान बुद्ध के विचारों के बताए मार्ग पर चलने के लिए आज की दुनिया को बहुत कुछ चाहिए।

आगे कहा कि आज दुनिया के सामने सभी चुनौतियों से मानवता को बचाने का यही तरीका है, चाहे वह हिंसा हो, अराजकता हो, आतंकवाद हो, जलवायु परिवर्तन हो। भारत सौभाग्यशाली है कि उसे भगवान बुद्ध का प्रत्यक्ष आशीर्वाद मिला है। उनके विचारों को आत्मसात कर भारत निरंतर मानवता की सेवा कर रहा है। चुनौतियां कितनी भी बड़ी क्यों न हों, भारत हमेशा उनका समाधान ढूंढता है।

पीएम ने कहा कि मैं जब भी जापान आता हूं तो देखता हूं कि आपके प्यार की बारिश हर बार बढ़ती जा रही है। आप में से कई मित्र यहां कई वर्षों से रह रहे हैं। जापान की भाषा, पहनावा, संस्कृति और खान-पान एक तरह से आपके जीवन का हिस्सा बन गए हैं। यह हमारी विशेषता है कि हम कर्मभूमि से तन-मन से जुड़ जाते हैं, भस्म हो जाते हैं। लेकिन मातृभूमि की जड़ों से जो जुड़ाव है, हम उससे कभी दूरी नहीं बनने देते। यही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।

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