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पाकिस्तान-बांग्लादेश से आने वाले हिंदू छात्रों को भारत में मिलेगी बेहतर शिक्षा, प्राथमिकता के आधार पर समस्या की जाएंगी दूर

पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से प्रताड़ित होकर भारत आए अल्पसंख्यक परिवारों के बच्चों के मन में अच्छी शिक्षा और बेहतर भविष्य पाने की उम्मीद बढ़ गई है।

पाकिस्तान-बांग्लादेश से आने वाले हिंदू छात्रों को भारत में मिलेगी बेहतर शिक्षा, प्राथमिकता के आधार पर समस्या की जाएंगी दूर
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प्रतीकात्मक तस्वीर

पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से प्रताड़ित होकर भारत आए अल्पसंख्यक परिवारों के बच्चों के मन में अच्छी शिक्षा और बेहतर भविष्य पाने की उम्मीद बढ़ गई है। क्योंकि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक हेल्प डेस्क बनाने की घोषणा की है, जिसकी मदद से आयोग के पास इन तमाम बच्चों की ओर से आने वाली शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर त्वरित निपटारा किया जा सकेगा। आयोग का मानना है कि पिछले साल 2019 में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के देश में लागू होने के बाद इस दिशा में तेजी से एक सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। कमीशन ने भी अपनी कवायदें तेज कर दी हैं, जिससे जल्द से जल्द इन बच्चों को बुनियादी शिक्षा व अन्य जरूरी अधिकार मिल सकेंगे।

बच्चों में जागी उम्मीद

एनसीपीसीआर के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने बताया कि सीएए कानून बनने के बाद आयोग द्वारा इन बच्चों के लिए नेशनल हेल्प डेस्क बनाने की पहल से इन तीनों देशों से भारत आए परिवारों के बच्चों के मन में एक उम्मीद जगी है और अपने भविष्य को लेकर इनका भरोसा भी बढ़ा है। पहले यह हमेशा एक उहापोह की स्थिति में रहते थे। जिसमें इन्हें यह पता ही नहीं होता था कि जीवन में आगे क्या करना है? स्कूल, कॉलेज में दाखिला होगा या नहीं? लेकिन अब इन्हें यह पता है कि इनके पास न सिर्फ देश में रहने का वैधानिक अधिकार है। बल्कि अपने सपनों को सच कर दिखाने की राह भी है।

राज्यों से सहयोग की अपीलआयोग इस मामले को लेकर काफी वक्त से सक्रिय है। जिसमें कोरोनाकाल में इस विषय को लेकर एक राष्ट्रीय कार्याशाला भी आयोजित की गई थी। आंकड़ों के हिसाब से देश में उक्त देशों से आए कुल करीब 20 लाख अल्पसंख्यक परिवार रहते हैं। इनकी ज्यादातर आबादी दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में है। आयोग की ओर से सभी राज्यों को यह सिफारिश की गई है कि ऐसे जरूरतमंद बच्चों को संयुक्त राष्ट्र संघ और देश के प्रावधानों के हिसाब से शिक्षा व अन्य जरूरी अधिकार जल्द से जल्द प्रदान किए जाने चाहिए।

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