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कोरोना वायरस संकट में भारतीय सेना बनी देवदूत, विदेशों से करा रही वतन वापसी

वैश्विक कोरोना संकट के इस दौर में भारतीय नौसेना सबके लिए देवदूत बनकर उभरी है। इसमें एक ओर वह अपने युद्धपोतों के जरिए लगातार विदेशों में फंसे हुए भारतीयों की सुरक्षित वापसी कराने में लगी हुई है तो दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुश्किल हालात में मित्र देशों की मदद करने के लिए शुरु किए गए मिशन सागर को दिन-रात पूरा करने में भी जुटी हुई है।

वैश्विक कोरोना संकट के इस दौर में भारतीय नौसेना सबके लिए देवदूत बनकर उभरी है। इसमें एक ओर वह अपने युद्धपोतों के जरिए लगातार विदेशों में फंसे हुए भारतीयों की सुरक्षित वापसी कराने में लगी हुई है तो दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुश्किल हालात में मित्र देशों की मदद करने के लिए शुरु किए गए मिशन सागर को दिन-रात पूरा करने में भी जुटी हुई है। नौसेना के मुताबिक इसी क्रम में मंगलवार को नौसेना के युद्धपोत मगर की मदद से मालद्वीप से 202 भारतीयों को कोच्चि लाया गया और एक अन्य युद्धपोत केसरी की मदद से मालद्वीप की सरकार को करीब 600 टन राहत एवं बचाव सामग्री सौंपी गई है।

15 मई से दूसरा चरण

मालद्वीप से भारतीय नागरिकों की वापसी का दूसरा चरण 15 मई से शुरु होगा। जिसमें जलाश्वा युद्धपोत के जरिए 700 लोगों को देश वापस लाया जाएगा। इससे पहले बीते 10 मई को जलाश्वा से ही 698 भारतीयों को कोच्चि लाया जा चुका है। 202 भारतीयों में 24 महिलाएं और 2 बच्चे भी शामिल हैं।

ऑनलाइन समारोह से दी मदद

मिशन सागर के तहत भारत कोविड-19 से जूझे रहे मित्र देशों को जरुरी राहत सामग्री पहुंचा रहा है, जिसमें 12 मई को सामाजिक दूरी के नियम का पालन करते हुए केसरी युद्धपोत के जरिए 580 टन खाद्य सामग्री और दवाओं को एक ऑनलाइन समारोह के जरिए मालद्वीप की सरकार को सौंपा गया। इसमें मालद्वीप के विदेश और रक्षा मंत्री अब्दुल्ला शाहिद, मारिया अहमद दीदी शामिल हुए। जबकि भारत की ओर से मालद्वीप में भारत के उच्चायुक्त संजय सुधीर ने इस कार्यक्रम में शिरकत की। मिशन सागर विदेश, रक्षा मंत्रालय के अलावा तमाम अन्य एजेंसियों के जरुरी सहयोग से चल रहा है। भारत और मालद्वीप के बीच मजबूत सैन्य और सामरिक संबंध हैं।kaj

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