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चीन से तनाव के बीच रूस पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, सैन्य उपकरणों को हवाई मार्ग से पहुंचाने की मांग

पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच जारी सीमा विवाद के बीच सोमवार से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के तीन दिवसीय रूस दौरे की शुरूआत हो गई है। इस दौरान वह रूस में आयोजित की जाने वाली विजय दिवस परेड में भाग लेंगे और उनकी रूस के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व के साथ मुलाकात होगी।

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केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच जारी सीमा विवाद के बीच सोमवार से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के तीन दिवसीय रूस दौरे की शुरूआत हो गई है। इस दौरान वह रूस में आयोजित की जाने वाली विजय दिवस परेड में भाग लेंगे और उनकी रूस के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व के साथ मुलाकात होगी। जिसमें रक्षा मंत्री रूस से खरीदे गए जिन सैन्य उपकरणों और कलपुर्जों को जल्द हवाई मार्ग से भेजने की अपील करेंगे।

इन महत्वपूर्ण मुद्दों पर होगी चर्चा

रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि इसमें पहला वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर बने हुए मौजूदा हालात के बीच चीन द्वारा वहां तनाव बढ़ाने के लिए किए गए भारी भरकम सैन्य जमावड़े के बारे में विस्तृत अपडेट दी जा सकती है। इसके अलावा भारत रूस से अपने लड़ाकू विमानों, पनडुब्बियों और जंगी टैंकों के लिए जरूरी कलपुर्जों की तुरंत हवाई मार्ग से सप्लाई करने की भी गुजारिश कर सकता है।

इन कलपुर्जों की जरूरत

रूस से जो सैन्य उपकरणों और कलपुर्जे आना हैं उसमें वायुसेना के लड़ाकू विमान सुखोई-30 एमकेआई, मिग-29 लड़ाकू विमान, नौसेना के मिग-29के लड़ाकू विमान, किलो श्रेणी की पनडुब्बियों, जंगी युद्धपोतों से लेकर सेना का टी-90 टैंक शामिल है। पहले इनकी सप्लाई समुद्री मार्ग के जरिए की जाती थी।

एस-400 की डिलीवरी

रूसी पक्ष से होने वाली बातचीत के दौरान राजनाथ सिंह एस-400 हवाई रक्षा प्रणाली को भारत को सौंपने के कार्य में तेजी लाने को भी कह सकते हैं। पहले इस सिस्टम को अगले वर्ष 2021 के अंत तक भारत को सौंपा जाना था लेकिन रूस ने इसके डिलीवरी समय के क्रम में कुछ बदलाव कर दिए हैं, जिसमें कुछ चीजों की पेमेंट में हो रही देरी को वजह बताया जा रहा है।

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