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कोरोना वायरस ऐसे नष्ट हो सकता है, चार एंटीबॉडी से नष्ट करनी होगी कोविड 19 की कटीली परत

कोरोना वायरस की वैक्सीन या दवा बनाना इसलिए चुनौतीपूर्ण है क्योंकि अन्य विषाणुओं की तुलना में यह काफी अलग है। आमतौर पर वायरस सिर और पूंछ वाले होते हैं। वायरस का ऊपरी भाग यानी सिर प्रोटीन से बना होता है, जो कैप्सिड कहलाता है। यह प्रायः एक षटकोणीय (छः कोने वाली) संरचना होती है। जिसमें डीएनए या आरएनए रहता है।

कोरोना वायरस ऐसे नष्ट हो सकता है, चार एंटीबॉडी से नष्ट करनी होगी कोविड 19 की कटीली परत

कोरोना वायरस की वैक्सीन या दवा बनाना इसलिए चुनौतीपूर्ण है क्योंकि अन्य विषाणुओं की तुलना में यह काफी अलग है। आमतौर पर वायरस सिर और पूंछ वाले होते हैं। वायरस का ऊपरी भाग यानी सिर प्रोटीन से बना होता है, जो कैप्सिड कहलाता है। यह प्रायः एक षटकोणीय (छः कोने वाली) संरचना होती है, जिसमें डीएनए या आरएनए रहता है।

वायरस का दूसरा भाग पूंछ कहलाता है, जिसमें नीचे की ओर कांटेनुमा संरचनाएं होती हैं। इसकी मदद से ही वायरस मनुष्य की कोशिका पर चिपकता है और एक सिरिंज की माफिक डीएनए को मनुष्य की कोशिका में प्रवेश करा देता है। जहां पहुंचकर यह वायरस की असंख्य कॉपी बना लेता है।

सामान्य वायरस के विपरीत कोरोना वायरस की बाहरी सतह पर कांटों वाली प्रोटीन परत होती है, जिससे यह मानव कोशिका में घुसता है। इस संक्रमणकारी परत को नष्ट करना ही वैज्ञानिकों के लिए एक चुनौती है। अमेरिकन एसोसियेशन फॉर द एडवांसमेंट ऑफ साइंस की पत्रिका 'साइंस' में प्रकाशित लेख के अनुसार केवल एक एंटीबॉडी से कोरोना वायरस (कोविड-19) की संरचना को नष्ट करना असंभव है।

इसके बजाय चार एंटीबॉडी मिलकर ही इसकी संक्रमण क्षमता को नष्ट कर पाएंगे। ये चारों एंटीबॉडीज, वायरस की बाहरी कंटीली परत वाली सतह को नष्ट करके उसकी संक्रमण शक्ति को समाप्त कर देंगी और वायरस मानव शरीर की कोशिकाओं के ऊपर मौजूद एंजाइम एसीई-2 से चिपक नहीं पाएगा और नष्ट हो जाएगा।

'साइंस' जर्नल में छपे लेख के अनुसार ये चारों एंटीबॉडीज बी 38, एच4, बी5 और एच2 उन मरीजों से निकाले गए, जो कोरोना संक्रमण से मुक्त हो चुके थे। यह खोज कोरोना टीका विकसित करने में बड़ी सफलता मानी जा रही है। भविष्य में यदि वायरस अपना रूप बदलता है तो भी चारों में से कोई एक एंटीबॉडी उसके साथ-साथ अपना रूप भी बदल लेगी और वो वायरस के नए स्वरूप को नष्ट कर देगी।

इसका चूहों पर प्रयोग सफल रहा है। वैज्ञानिकों ने यह दावा किया है कि इस प्रोसेस में दो एंटीबॉडीज, वायरस से चिपककर उसे नष्ट करती हैं जबकि बाकी दो एंटीबॉडीज, कोशिका में आस-पास रहते हुए वायरस की रासायनिक प्रक्रिया को बढ़ने नहीं देंगी। फलस्वरूप वायरस पूर्ण रूप से या तो नष्ट हो जाएगा या निष्क्रिय हो जाएगा।

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