Web Analytics Made Easy - StatCounter
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

chandrayaan 2: आज विक्रम लैंडर के ऊपर से गुजरेगा नासा का ऑर्बिटर, मिलेगी अच्छी खबर

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) का प्रोब मिशन मंगलवार को चांद के उस हिस्से के ऊपर से गुजरेगा। इससे पहले नासा ने रेडियो तरंगों के जरिए विक्रम को ‘हैलो’ संदेश भेजा था। लेकिन अभी तक उसे भी जवाब नहीं मिला है।

chandrayaan 2: आज विक्रम लैंडर के ऊपर से गुजरेगा नासा का ऑर्बिटर, मिलेगी अच्छी खबरchandrayaan 2 Vikram lander NASA Orbiter Picture

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) का प्रोब मिशन मंगलवार को चांद के उस हिस्से के ऊपर से गुजरेगा। जहां इसरो का मिशन चंद्रयान 2 (Chandrayaan 2) का लैंडर विक्रम (Vikram Lander) पड़ा हुआ है। अभी भी इसरो लैंडर से संपर्क की कोशिश में जुटा हुआ है।

मीडिया के अनुसार, नासा का लुनार रिकॉनियसैंस ऑर्बिटर (LRO) जैसे ही चांद के इस हिस्से से आसमान से गुजरेगा। वहां से वह विक्रम की तस्वीरें भेजेगा। यह भी कहा जा रहा है कि, ये तस्वीरें ज्यादा साफ नहीं होंगी। एलआरओ (Lunar Reconnaissance

Orbiter) परियोजना वैज्ञानिक नोआ पेट्रो के मुताबिक, नासा ये तस्वीरें इसरो के वैज्ञानिकों को मुहैया कराएगा, ताकि चंद्रयान-2 मिशन के विक्रम के बारे में सटीक आकलन किया जा सके।

इन तस्वीरों से विक्रम की सही हालत का अंदाजा लगाया जा सकेगा। विक्रम चांद की सतह पर अपने उतरने वाली तय जगह से महज 335 मीटर की दूरी पर पड़ा हुआ है। इस बीच, सात सितंबर को हुई हार्ड लैंडिंग के चलते कोई जवाब नहीं दे रहे विक्रम से भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो भी संपर्क साधने की कोशिशों में लगा हुआ है।

चांद पर अब ढलने लगी है शाम

चांद का पूरा दिन यानी सूरज की रोशनी वाला पूरा समय धरती के 14 दिनों के बराबर होता है। इन दिनों में चांद के इस इलाके में सूरज की रोशनी रहती है। 14 दिन बाद यानी 20-21 सितंबर को चांद पर रात होनी शुरू हो जाएगी। दरअसल, सोमवार से ही चांद पर शाम का वक्त शुरू हो चुका है। विक्रम जिस वक्त चांद पर गिरा, उस समय वहां सुबह ही हुई थी। 14 दिन काम करने का मिशन लेकर गए विक्रम और उसके रोवर प्रज्ञान के मिशन का वक्त पूरा हो जाएगा। इस अवधि के बाद सौर पैनलों के सहारे चलने वाले विक्रम के लिए यह वक्त बेहद सर्द हो जाएगा।

नासा के 'हैलो' का जवाब अब तक नहीं मिला

नासा ने रेडियो तरंगों के जरिए विक्रम को 'हैलो' संदेश भेजा था। नासा की जेट प्रपल्शन लेबोरेटरी ने विक्रम को रेडियो तरंगें भेजी थी, ताकि उसकी कोई प्रतिक्रिया मिल सके, मगर विक्रम का अभी तक कोई जवाब नहीं आया। सूत्रों का कहना है कि नासा की लेबोरेटरी इसरो की मंजूरी के साथ डीप स्पेस नेटवर्क (डीएसएन) के जरिए विक्रम से अब भी संपर्क करने में जुटी है।

Next Story
Share it
Top