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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2018: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर निबंध

नारी को सृजन की शक्ति मानकर समूचे विश्व में 8 मार्च को अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2018: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर निबंध
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International Women Day Essay

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस महिलाओं की उपलब्धियों और नारी-सम्मान के तौर पर मनाया जाता है। भारतीय संस्कृति में स्त्री की भूमिका पुरुष से कहीं अधिक सम्माननीय है।

हमारे पुराणों में भी नारी को गुरुतर मानते हुए यह कहा गया है कि 'यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता' अर्थात् जहां नारियों की पूजा की जाती है, महिलाओं को सम्मान मिलता है, देवता का निवास भी वहीं होता है।

नारी-सृजन की शक्ति

महिला के बिना पुरुष अस्तित्व विहीन है। सृष्टि पर मानव जगत का आधार स्त्री ही है। नारी को सृजन की शक्ति मानकर समूचे विश्व में 8 मार्च को अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है।

सैकड़ों वर्ष पूर्व सतयुग, त्रेता और द्वापर युग में देवता भी नारी की शक्ति का सम्मान करते थे। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मानाने के मूल में महिलाओं को कुरीतियों के मझधार से निकालकर उसे विकसित, परिष्कृत और सुसंस्कृत करना है। इसका उद्देश्य ना केवल खुद को सशक्त होना है बल्कि एक शक्तिशाली समाज के निर्माण में भरपूर योगदान करना है।

पहला अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस सबसे पहले अमेरिका में सोशालिष्ट पार्टी के आह्वान पर 28 फरवरी 1909 को मनाया गया था। अमेरिका में उस समय महिला दिवस मनाए जाने के पीछे महिलाओं को वोट देने का अधिकार हासिल करना था।

क्योंकि तत्कालीन परिस्थिति में संपूर्ण विश्व में कहीं भी महिलाओं को वोट देने का अधिकार प्राप्त नहीं था। महिला दिवस की महत्ता तब और अधिक बढ़ गई जब रूस की महिलाओं से रोटी और कपड़े के लिए वहां की तत्कालीन सरकार के लिए आन्दोलन छेड़ दिया।

जब यह आन्दोलन प्रारंभ हुआ उस समय वहां जुलियन कैलेंडर के मुताबिक 28 फरवरी, रविवार का दिन था। लेकिन ग्रेगेरियन कैलेंडर के मुताबिक यह दिन 8 मार्च को पड़ता था इसलिए कालांतर में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 28 फरवरी को ना मनाकर 8 मार्च को मनाया जाता है। भारत में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस महिलाओं की उपलब्धियों और नारी-सम्मान के तौर पर मनाया जाता है।

भारतीय संस्कृति में महिला को माता का स्थान दिया गया है। इतिहास के पन्ने नारी के गुणगान से भरे हैं। भारत की आजादी में रानी लक्ष्मीबाई जैसी ना जाने कितनी वीरांगनाओं ने अपने प्राणों की आहुति दी।

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