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International Women''s Day 2018: महिलाओं के विकास के लिए काम कर रही है ये NGO''s, जाने इनके बारे में

हर साल 8 मार्च अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर कई तरह की मुहिम चलाई जाती हैं, कार्यक्रम आयोजित होते हैं, जिनके जरिए महिलाओं से जुड़े विषयों पर चर्चा होती है।

International Womens Day 2018: महिलाओं के विकास के लिए काम कर रही है ये NGOs, जाने इनके बारे में
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हर साल 8 मार्च अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर कई तरह की मुहिम चलाई जाती हैं, कार्यक्रम आयोजित होते हैं, जिनके जरिए महिलाओं से जुड़े विषयों पर चर्चा होती है।
ऐसे समाधान और राहें खोजी जाती हैं, जो महिलाओं को सशक्त बनाएं। लेकिन दुनिया भर में तमाम ऐसे संगठन और संस्थाएं हैं, जो महिला हितों के लिए प्रतिबद्ध हैं और पूरे साल इस दिशा में सक्रिय रहती हैं।

वूमेन फॉर वूमेन इंटरनेशनल

इस संगठन की शुरुआत सन 1993 में हुई था। यह युद्ध, गृह युद्ध, आतंकवाद से पीड़ित महिलाओं की आर्थिक रूप से मदद करता है। इतना ही नहीं उन्हें आत्मनिर्भर बनाने, उनका खोया हुआ आत्मविश्वास बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाता है।
इस संगठन ने अब तक जॉब स्किल ट्रेनिंग, लघु व्यापार विकास, शिक्षा और सीधी आर्थिक मदद जैसे कई उपाय शामिल कर 3,51,000 से भी ज्यादा महिलाओं की मदद की है।
फिलहाल यह संस्था अफगानिस्तान, बोस्निया और हर्जेगोविना, कॉन्गो डेमोक्रेटिक रिपब्लिक, इराक, कोसोवो, नाइजीरिया, रवांडा और दक्षिण सूडान में सक्रिय है।
यह संस्था हिंसक घटनाओं से पीड़ित देशों में रहने वाली महिलाओं को एक वर्षीय जॉब स्किल और बिजनेस ट्रेनिंग भी देता है। साथ ही युद्ध की विभीषिका भोग चुकी महिलाओं के लिए ग्रुप थेरेपी जैसे कार्यक्रम भी करता है, जिससे वे सहज जीवन जी पाएं।

लेडीज लर्निंग कोड

यह एक ऐसी संस्था है, जो महिलाओं को टेक्निकल स्किल्स सिखाती है। इसकी शुरुआत एक ऐसे ट्वीट से हुई, जिसमें महिलाओं को कंप्यूटर कोड में ज्यादा फ्लूएंट होने की आवश्यकता पर जोर दिया गया था। उसके बाद टोरंटो में लेडीज लर्निंग कोड की शुरुआत हुई।
यह संस्था 9 से 15 साल की लड़कियों को ट्रेनिंग देती है। साथ ही ऐसे वर्कशॉप्स का आयोजन करती है, जिनमें महिलाओं को जावा स्क्रिप्ट, एचटीएमएल और फोटोशॉप जैसी टेक्निकल कंप्यूटर प्रोग्राम के बारे में बताया जाता है।

यंग फीमेल एंटरप्रेन्योर्स

आज 20-30 वर्ष की कई महिलाएं नौकरी की बजाय अपना बिजनेस करना चाहती हैं। लेकिन सही दिशा-निर्देश न होने की वजह से वे ऐसा नहीं कर पातीं। यह ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ऐसी ही महिलाओं की मदद करता है।
यहां महिलाओं द्वारा स्थापित किए गए स्टार्टअप्स की सफलता की कहानियां बताई जाती हैं, बिजनेस और मार्केटिंग से जुड़ी मोटिवेशनल बातें बताई जाती हैं। इसके साथ ही यूजफुल आइडियाज भी शेयर किए जाते हैं।
यहां एंटरप्रेन्योर बनने की इच्छुक युवा महिला अपने मन में उठ रही तमाम शंकाओं के समाधान विशेषज्ञों से जान सकती हैं। इसके अलावा बिजनेस से जुड़ी बातें ट्वीटर चैट, समय-समय पर अलग-अलग शहरों में वीकली लाइव शो के जरिए भी साझा की जाती हैं।

स्कूल गर्ल्स यूनाइट

यह एक नॉन प्रॉफिट ऑर्गनाइजेशन है, जो शिक्षा के माध्यम से लड़कियों को सशक्त बनाने का काम करती है। इसे 12 वर्षीय लड़कियों के समूह और कुछ युवा अफ्रीकी महिलाओं ने साथ मिलकर शुरू किया था।
ये महिलाएं विकासशील देशों में लड़कियों द्वारा भोगी गई भेदभाव की नीतियों से परिचित हैं, इसलिए इन्होंने शिक्षा को अपनी लड़ाई का हथियार बनाया और लड़कियों को शिक्षित करने की मुहिम छेड़ी।
यूनाइटेड स्टेट्स के सहयोग से पश्चिम अफ्रीका के एक देश माली में यह संगठन काम करता है। यह संगठन माली में आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से ताल्लुक रखती लड़कियों को स्कॉलरशिप भी देता है।

गर्ल्स इंक

गल्स्र् इंक यानी गर्ल्स इनकॉर्पोरेटेड, एक नॉन प्रॉफिट ऑर्गनाइजेशन है, जो महिलाओं को मजबूत बनने की प्रेरणा देता है। यह कनाडा और यूनाइटेड स्टेट्स के कई संगठनों के नेटवर्क के माध्यम से काम करता है। यह संगठन अपनी सदस्यों को शिक्षा के लिए स्कॉलरशिप भी देता है।

कनेक्टेड वूमेन

यह एक ऐसा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है, जहां 70 देशों की महिलाओं को एक-दूसरे से जुड़ने का मौका मिलता है। वे यहां अपने अनुभव और विशेषज्ञता एक-दूसरे से शेयर करती हैं। साथ ही महिलाओं को जीवन में, करियर में आगे बढ़ने के लिए एक्सपर्ट एडवाइस भी दी जाती है।

एवरी मदर काउंट्स

समूचे विश्व में प्रतिवर्ष प्रसव के दौरान हजारों महिलाओं की मृत्यु हो जाती है। यह संगठन गर्भावस्था और प्रसव के दौरान होने वाली मृत्यु दर को कम करने के लिए अलग-अलग जगहों पर अभियान चलाता है।
इस संगठन की शुरुआत क्रिस्टी टर्लिंगटन ने की थी, जो ‘नो वूमेन, नो क्राई’ नाम की डॉक्यूमेंट्री भी बना चुका है। यह फिल्म भी प्रेग्नेंट महिलाओं की कहानी को ही बयां करती है।
यह संगठन मूलत: महिलाओं और लड़कियों की सेहत और शिक्षा पर कार्य करता है। इनका मानना है कि महिलाओं की जागरूकता और सावधानी ही 90 फीसदी तक ऐसी मौतों को रोक सकती है।
यह संगठन पुराने मोबाइल फोन का भी संग्रह करता है ताकि ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को वह फोन दे सके और जरूरत पड़ने पर यानी गर्भावस्था के दौरान कभी भी मेडिकल सर्विसेज की जरूरत होने पर, वे निकट के अस्पताल या डॉक्टर से संवाद कर सकें।

एनजीओ-ऑनलाइन प्लेटफॉर्म

इस साल अंतररार्ष्ट्रीय महिला दिवस की थीम ‘टाइम इज नाउ : रूरल एंड अर्बन एक्टिविस्ट ट्रांसफॉर्मिंग वूमेंस लाइफ’ है। इसके जरिए ऐसे लोगों को सराहा जा रहा है, जिन्होंने महिलाओं के जीवन सुधार में बहुत योगदान दिया है, प्रयास किए हैं। लेकिन दुनिया भर में कुछ ऐसे एनजीओ और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स वर्षों से चलाए जा रहे हैं, जो महिला हितों के लिए एक्टिव हैं। इनमें से कुछ पर एक नजर।

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