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''अग्नि-5'' भारत की पहली इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल, चीन के कौने-कौने को कर सकती है तबाह

डीआरडीओ द्वारा निर्मित अग्नि-5 परमाणु क्षमता वाली सरफेस-टू-सरफेस मिसाइल है ये 5 से 8 हजार किलोमीटर तक के दायरे में निशाना साध सकती है।

अग्नि-5 भारत की पहली इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल, चीन के कौने-कौने को कर सकती है तबाह
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परमाणु आयुध ले जाने में सक्षम लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल ‘अग्नि-5' का रविवार को ओडिशा तट पर सफलतापूर्वक परीक्षण किया।

इस मिसाइल की मारक क्षमता 5,000 से 8 हजार किलोमीटर है। इसे भारत ने स्वदेश में विकसित किया है।

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा स्वदेश निर्मित यह परमाणु क्षमता वाली सरफेस-टू-सरफेस मिसाइल 5,000 से 8,000 किलोमीटर तक के दायरे में निशाना साध सकती है।

यह चीन के लगभग हर हिस्से में पहुंच सकती है। 50 टन के भार वाली इस मिसाइल की लंबाई 17 मीटर और चौड़ाई 2 मीटर है। यह अपने साथ एक टन से ज्यादा के परमाणु हथियार ले जा सकती है।

इससे पहले इन तारीखों में हुए परीक्षण

व्हीलर आईलैंड के नाम से मशहूर आईलैंडज से बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण लॉन्च पैड नंबर 4 से सुबह के 9.48 मिनट पर किया गया।

यह छठवीं बार है जब मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया है। इसका आखिरी बार सफल परीक्षण इसी साल 18 जनवरी को किया गया था।

अग्नि-5 का पहला परीक्षण 19 अप्रैल, 2012 को किया गया था। दूसरी बार सितंबर 15, 2013 को, तीसरी बार 31 जनवरी 2015 को और चौथी बार 26 दिसबंर 2016 को इसका परीक्षण हुआ।

अग्नि 1,2,3 पाक के लिए व 4 और 5 की जद में चीन

अग्नि-5 का आखिरी बार दिसंबर 2016 में परीक्षण किया गया था जिसे यह कहकर परिभाषित किया गया था कि यह इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) का आखिरी परीक्षण है। अग्नि-5, अग्नि सीरीज की मिसाइलें हैं जिसे डीआरडीओ ने विकसित किया है।

आपको बता दें कि भारत के पास पहले से ही अग्नि-1, अग्नि-2 और अग्नि-3 मिसाइलें हैं। इन्हें पाकिस्तान के खिलाफ बनाई गई रणनीति के तहत तैयार किया गया है। वहीं अग्नि-4 और अग्नि-5 को चीन को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।

10 साल में अग्नि 1 से पांच तक पहुंचा भारत

अग्नि-5 भारत की पहली अंतर महाद्वीपीय यानी इंटरकॉन्टिनेंटल बालिस्टिक मिसाइल है। अग्नी-5 के बाद भारत की गिनती उन 5 देशों में हो गई है जिनके पास है इंटरकॉन्टिनेंटल बालिस्टिक मिसाइल यानी आईसीबीएम है।

भारत से पहले अमेरिका, रूस, फ्रांस और चीन ने इंटर-कॉन्टिनेंटल बालिस्टिक मिसाइल की ताकत हासिल की है. ये करीब 10 साल का फासला है जब भारत की ताकत अग्नि-1 मिसाइल से अब अग्नि 5 मिसाइल तक पहुंची है।

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