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उत्तर कोरिया-दक्षिण कोरिया के दोनों नेताओं ने हाथ मिलाकर रचा इतिहास, 65 साल पुरानी दुश्मनी दोस्ती में बदली

उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के नेताओं ने आज सैन्य सीमांकन रेखा पर हाथ मिलाकर दोनों देशों के संबंधों में नया अध्याय शुरू किया। परमाणु संघर्ष को लेकर महीनों तक पूरी दुनिया में डर का माहौल रहने के बाद दोनों देशों के बीच तेजी से बढ़ी घनिष्ठता के मद्देनजर दोनों नेताओं का हाथ मिलाना मील का पत्थर है।

उत्तर कोरिया-दक्षिण कोरिया के दोनों नेताओं ने हाथ मिलाकर रचा इतिहास, 65 साल पुरानी दुश्मनी दोस्ती में बदली

उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के नेताओं ने आज सैन्य सीमांकन रेखा पर हाथ मिलाकर दोनों देशों के संबंधों में नया अध्याय शुरू किया। परमाणु संघर्ष को लेकर महीनों तक पूरी दुनिया में डर का माहौल रहने के बाद दोनों देशों के बीच तेजी से बढ़ी घनिष्ठता के मद्देनजर दोनों नेताओं का हाथ मिलाना मील का पत्थर है।

हाथ मिलाकर नये युग का सूत्रपात करने की दुनिया की कुछ अन्य घटनाओं के विवरण इस प्रकार हैं-

अराफात-राबिन, 1993

अराफा-राबिन ने 1993 में हाथ मिलाकर इस्राइल और फलस्तीन के संबंधों में नया अध्याय लिखा था। नॉर्वे में महीनों तक गुप्त बातचीत के बाद तत्कालीन इस्राइली प्रधानमंत्री यित्झक राबिन और फलस्तीनी नेता यासर अराफात ने 13 सितंबर 1993 को व्हाइट हाउस के साउथ लॉन में ओस्लो संधि पर हस्ताक्षर किए।

उसके बाद इस्राइल- फलस्तीन संघर्षों के बेहद नाटकीय क्षणों में से एक के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की मौजूदगी में अराफात और राबिन ने एक- दूसरे से हाथ मिलाया।

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उस विफल प्रक्रिया ने अलग राज्य के गठन के बिना ही कब्जे वाले फलस्तीनी भूभाग को स्वायत्तता दी और छह साल से से चल रहे फलस्तीनी विद्रोह- इतिफादा का अंत हुआ।
इतिफादा के दौरान 1200 से अधिक फलस्तीनी मारे गए और तकरीबन 150 इस्राइली मारे गए। राबिन की दो साल बाद शांति प्रक्रिया के विरोधी यहूदी उग्रवादियों ने हत्या कर दी। शांति प्रक्रिया बाद के वर्षों में विफल हो गई और 2000 में द्वितीय इतिफादा शुरू हुआ।

ओबामा-कास्त्रो, 2013

2013 में नेल्सन मंडेला की स्मृति सभा में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने क्यूबा के तत्कालीन राष्ट्रपति राउल कास्त्रो से हाथ मिलाकर दोनों देशों के रिश्तों पर वर्षों से जमी बर्फ को थोड़ा पिघलाया।

दशकों तक शत्रुता के बाद दोनों देशों के नेताओं के बीच इस तरह का यह पहला सार्वजनिक अभिवादन था। कुछ ही महीने के भीतर दोनों देशों के रिश्तों में तेजी से गरमाहट आई।

जुलाई 2015 में दोनों देशों के बीच पूर्ण राजनयिक संबंध बहाल हुआ। तकरीबन आधी सदी तक दोनों देशों के बीच शत्रुता के बाद एक समय में संबंधों में सुधार की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी।

ओबामा ने 2016 में क्यूबा की यात्रा की। 88 वर्षों में किसी अमेरिकी राष्ट्रपति की यह पहली क्यूबा यात्रा थी। वाशिंगटन ने कम्युनिस्ट देश में दशकों पुराने प्रतिबंधों में भी ढील दी और अमेरिकी एयरलाइनों ने नवंबर 2016 में हवाना के लिये सीधी उड़ान सेवा बहाल की।

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क्वीन एलिजाबेथ-मैकगिनीज, 2012

उत्तरी आयरलैंड की शांति प्रक्रिया में यह एक ऐतिहासिक क्षण था जब ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने आयरिश रिपब्लिकन आर्मी में पूर्व सैन्य कमांडर मार्टिन मैकगिनीज से मुलाकात की।

ब्रिटिश सेना के साथ वर्षों की खूनी शत्रुता के बाद महारानी एलिजाबेथ द्वितीय की आयरिश रिपब्लिकन आर्मी के पूर्व सैन्य कमांडर से यह मुलाकात हुई थी। मैकगिनीज तब उत्तरी आयरलैंड के प्रथम उप मंत्री थे। उन्होंने महारानी की 2012 में प्रांत की यात्रा के दौरान उनसे हाथ मिलाया।

शी-मा, 2015

1949 में गृह युद्ध के समाप्त होने के बाद दुखद विच्छेद के बाद कई दशकों के उपरांत चीन और ताइवान के राष्ट्रपति पहली बार सिंगापुर में एक-दूसरे से मिले। एक अप्रत्याशित दृश्य के तहत चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने ताइवान के राष्ट्रपति मा यिंग-ज्यो से एक मिनट से अधिक समय तक हाथ मिलाया।

इस शिखर बैठक के बाद बीजिंग और ताइपे के बीच हॉटलाइन स्थापित हुआ और ताइवान और चीन के संबंधों में तनाव में कमी आई। इसमें कोई शक नहीं कि यह बैठक ऐतिहासिक थी, लेकिन दोनों तरफ से कोई बड़ी रियायत नहीं दी गई।

घरेलू मोर्चे पर मा को इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ी। ताइवान की संप्रभुता को लेकर डर के साये के बीच ताइवानी मतदाताओं ने 2016 के चुनाव में चीन विरोधी साई इंग वेन को चुना।

अब पूरी दुनिया की निगाहें उत्तर कोरियाई राष्ट्रपति किम जोंग उन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच होने वाली मुलाकात पर टिकी हैं। इस दौरान दोनों नेता हाथ मिलाकर एक नया इतिहास बना सकते हैं। (एएफपी)

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