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भारत-चीन सीमा पर खुफिया नेटवर्क मजबूत होगा, सरकार ने दी मंजूरी

एसएसबी की नागरिक शाखा की कुल 2,765 चौकियां अगले सालभर में आईबी की कमान में आ जाएंगी।

भारत-चीन सीमा पर खुफिया नेटवर्क मजबूत होगा, सरकार ने दी मंजूरी
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भारत-चीन सीमा पर देश का खुफिया नेटवर्क आने वाले दिनों में और मजबूत होने जा रहा है।

सरकार ने सीमा जासूसी योजना को मंजूरी देते हुए तय किया है कि सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की नागरिक शाखा के 2000 से अधिक कर्मचारी पूर्वी सीमा पर खुफिया ब्यूरो (आईबी) की जमीनी उपस्थिति बढ़ाने के लिए आईबी में भेजे जाएंगे।

सरकार का यह कदम इसलिए भी अहम है, क्योंकि इससे 'डेड' मानी जाने वाली एसएसबी की नागरिक शाखा को नया जीवन मिलेगा।

एसएसबी की नागरिक शाखा की कुल 2,765 चौकियां अगले सालभर में आईबी की कमान में आ जाएंगी। इनमें से 2,039 चौकियां अभी सक्रिय हैं।

एसएसबी की नागरिक शाखा आईबी के हवाले

भारत पूर्वी सीमा पर सड़कों और सैन्य बुनियादी ढांचों का निर्माण कर अपनी रक्षा मजबूत करने में जुटा है।उपलब्ध ब्लूप्रिंट के मुताबिक, 'एसएसबी की नागरिक शाखा आईबी के हवाले की जाएगी। उसके भंडार और अन्य चीजें जैसे जमीन, बुनियादी ढांचा, उपकरण आदि आईबी की कमान में होंगे।'

इस महत्वाकांक्षी योजना की जानकारी रखने वाले एक शीर्ष सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि इससे संबंधित 300 पन्नों के प्रस्ताव को एसएसबी मुख्यालय में तैयार किया गया था और उसे गृह मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार कार्यालय को भेजा गया।

अब तक मानी जाती रही है मृत

उन्होंने बताया कि एसएसबी की नागरिक इकाई को काफी हद तक 'डेड' माना जाता है, क्योंकि उसमें प्रमोशन और काम के ज्यादा मौके नहीं हैं।

यही वजह है कि इस इकाई को पूर्वी सीमा पर आईबी की उपस्थिति बढ़ाने के लिए तैनात किया जाएगा, जहां इन अधिकारियों ने लंबे वक्त तक काम किया है।

अधिकारी ने बताया कि इन कर्मियों की औसत उम्र 50 से अधिक है। उन्होंने नेपाल और भूटान सीमाओं पर रहने वाले लोगों के साथ काफी काम किया है।

उन्होने न केवल लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया, बल्कि वे एसएसबी की आंख और कान बने रहे।

भारत समर्थक भावना जगाने हुई थी गठित

भारत चीन युद्ध के करीब सालभर बाद इस शाखा को सीमावर्ती क्षेत्रों में काम करने और स्थानीय लोगों के बीच राष्ट्रीय अपनत्व और भारत समर्थक भावना जगाने के लिए पहली बार गठित किया गया था। उसने 2001 तक खुफिया एजेंसी रॉ के तहत स्पेशल सर्विस ब्यूरो के नाम से काम किया।

1999 के कारगिल युद्ध के बाद इस बल का नाम 2003 में बदलकर सशस्त्र सीमा बल कर दिया। उस पर भारत नेपाल और भारत भूटान सीमा की चौकसी करने का जिम्मा डाला गया।

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