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रामभरोसे ट्रेनों का बोझ उठाए हैं जर्जर पुल, धन की कमी बनी रोड़ा

देशभर में रेलवे के करीब 1 लाख 33 हजार 612 छोटे बड़े पुल हैं जिनमें ज्यादातर ब्रिटिश शासनकाल में बनाये गये थे।

रामभरोसे ट्रेनों का बोझ उठाए हैं जर्जर पुल, धन की कमी बनी रोड़ा

नई दिल्ली. हरदा रेल हादसे ने रेलवे के कमजोर ढांचे की पोल खोल दी है। यह कहना गलत नहीं होगा कि दशकों पुराने बहुत से कमजोर और जर्जर पुल भगवान भरोसे ही दौड़ती ट्रेनों का बोझ संभाले हुए है। देशभर में रेलवे के करीब 1 लाख 33 हजार 612 छोटे बड़े पुल हैं जिनमें ज्यादातर ब्रिटिश शासनकाल में बनाये गये थे। देश के दूरराज के राज्यों की तो बात ही छोड़िये राजधानी दिल्ली में युमना के ऊपर बना लोहे का पुल करीब 150 साल पुराना है, कितनी ही बार इसकी कमजोर हालत का रोना रोया जाता है लेकिन 'चलता है' की तर्ज पर हर रोज यहां से बड़ी संख्या में ट्रेनों की आवाजाही हो रही है।

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रेलवे के 720 पुल महत्वपूर्ण दज्रे में गिने जाते हैं और 10828 पुलों को प्रमुख र्शेणी का माना जाता है। इसके अलावा बाकी बचे करीब 1,21,612 पुल छोटे पुल के तौर पर गिने जाते हैं। देश के दुर्गम इलाकों में स्थित रेलवे के बहुत से पुल अंग्रेजों के समय में बनाये गये थे। जाहिर है कि ये पुल निर्माण हुए लंबा समय बीत जाने के बाद बहुत ही कमजोर हालत में हैं। रेलवे मंत्रालय भले ही मरम्मत की बात कहकर कर्तव्य पूरा मान ले लेकिन सच्चाई यही है कि यहां से ट्रेन गुजारना खतरे से खाली नहीं है।

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धन की कमी राह में रोड़ाः- रेलवे ढांचा दुरुस्त करने की बात जब भी होती है तो धन की कमी इस राह में बड़ा रोड़ा मान ली जाती है। प्रतिदिन 12617 ट्रेनें 63870 डिब्बों के साथ करीब 23 मिलियन यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाती है। 7421 माल गाड़ियां भी रोज रेलवे ट्रैक पर दौड़ती हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि रेलवे के ढांचे पर भारी दबाव है। विशेषज्ञों का कहना है किचलते रूट पर निर्माण शुरू करने पर ट्रेनों को वैकल्पिक मार्ग चाहिए परंतु सभी लाइनों पर पहले ही भारी दबाव है।

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