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इन्फैंट्री डे 2018ः 71 साल पहले भारतीय सेना ने पाकिस्तान के छुड़ा दिए थे छक्के

इन्फैंट्री का मतलब पैदल सेना से है। इन्फैंट्री भारतीय सेना का एक महत्वपूर्ण अंग है। देश की सुरक्षा में इन्फैंट्री का अहम योगदान है। इतिहास के हिसाब से अक्टूबर 1947 का महीना था। देश को आजाद हुए कुछ दो महीने हुए थे।

इन्फैंट्री डे 2018ः 71 साल पहले भारतीय सेना ने पाकिस्तान के छुड़ा दिए थे छक्के
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इन्फैंट्री डे के मौके पर शनिवार को सेना प्रमुख बिपिन रावत ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इंडिया गेट पहुंचकर उन्होंने अमर जवान ज्योति स्थल पर शहीदों को फूल चढ़ाकर नमन किया। उन्होंने पाकिस्तान की ओर से लगातार जारी घुसपैठ पर पाकिस्तान को चेतावनी भी दी। लेकिन क्या आप जानते हैं इन्फैंट्री डे क्यों मनाया जाता है। अगर नहीं जानते तो, मह आपको बता रहे इन्फैंट्री डे के बारे में।
इन्फैंट्री का मतलब पैदल सेना से है। इन्फैंट्री भारतीय सेना का एक महत्वपूर्ण अंग है। देश की सुरक्षा में इन्फैंट्री का अहम योगदान है। इतिहास के हिसाब से अक्टूबर 1947 का महीना था। देश को आजाद हुए कुछ दो महीने हुए थे।
जम्मू कश्मीर उस समय भारत का हिस्सा नहीं था। क्योंकि मुस्लिमों की आबादी वहां ज्यादा थी इसके कारण पाकिस्तान की नजर उस पर बनी हुई थी। लेकिन क्योंकि महाराजा हरि सिंह हिंदू थे इस लिए वो पाकिस्तान में नहीं मिलना चाहते थे।
पाकिस्तान को जब इसकी खबर मिली तो उसे झटका लगा। बौखलाहट में आकर पाकिस्तान ने कबायली पठानों को कश्मीर में घुसपैठ की खातिर तैयार किया। उनकी फौज ने 24 अक्टूबर 1947 को सुबह ही धावा बोल दिया।

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इस विपत्ति में महाराजा हरि सिंह ने भारत से मदद मांगी। महराजा हरि सिंह ने भारत में विलय के समझौते पर हस्ताक्षर किए जिसके तुरंत बाद भारतीय सेना ने की सिख रेजिमेंट की एक बटालियन के इन्फेट्री सोल्जर्स को हवाई जहाज से श्रीनगर भेजा गया।
इन पैदल सैनिकों का काम था कि वह कश्मीर में घुसे घुसपैठियों से कश्मीर से मुक्त करा दें। हमलावर कबायलियों को पाकिस्तानी से का पूरा समर्थन था। उनकी संख्या करीब 5000 थी।
उन्हें यह भ्रम था कि पहाड़ को पार करके भारतीय सेना कश्मीर में दाखिल नहीं हो सकती। यह बात थी भी सच। सेना के जवान कुछ बंदूकों और गोलियों के साथ जा सकते थे लेकिन पाकिस्तान की सेना टैंक के साथ थी।
जिस पर विजय पाना मुश्किल हो जाता। इस पर भारतीय सैनिक पैदल ही टैंक के पुर्जों को खोल कर एक-एक करके कश्मीर ले गए। बाद में वहां पर फिर से जोड़ लिया और आक्रमण कर दिया।
27 अक्टूबर को कश्मीर को मुक्त करा लिया गया। इस पूरे मिशन में पैदल सैनिकों का विशेष योगदान था इसलिए हर साल 27 अक्टूबर को इन्फेंट्री डे मनया जाता है।
हमलावर कबायलियों की संख्या करीब 5000 थी और उनको पाकिस्तान की सेना का पूरा समर्थन हासिल था।

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कबायलियों ने एबटाबाद से कश्मीर घाटी पर हमला किया था। भारतीय पैदल सैनिकों ने आखिरकार कश्मीर को कबायलियों के चंगुल से 27 अक्टूबर, 2018 को मुक्त करा लिया।
चूंकि इस पूरे सैन्य अभियान में सिर्फ पैदल सेना का ही योगदान था, इसलिए इस दिन को भारतीय थल सेना के पैदल सैनिकों की बहादुरी और साहस के दिन के तौर पर मनाने का फैसला लिया गया।

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