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इंडोनेशिया में तबाही: सुनामी से 222 लोगों की मौत, 800 से अधिक घायल

इंडोनेशिया में ज्वालामुखी फटने के बाद समुद्र में आए सैलाब ने तबाही मचा दी। इंडोनेशिया की सुंदा खाड़ी में सुनामी की चपेट में आकर 222 लोगों की मौत हो गई जबकि 800 से ज्यादा जख्मी हैं।

इंडोनेशिया में तबाही: सुनामी से 222 लोगों की मौत, 800 से अधिक घायल
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इंडोनेशिया में ज्वालामुखी फटने के बाद समुद्र में आए सैलाब ने तबाही मचा दी। इंडोनेशिया की सुंदा खाड़ी में सुनामी की चपेट में आकर 222 लोगों की मौत हो गई जबकि 800 से ज्यादा जख्मी हैं। आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, शनिवार देर रात अनाक क्राकातोआ ज्वालामुखी फटने के बाद समुद्र के नीचे भूस्खलन आ गया।

इससे उठी 50 से 65 फीट ऊंची लहरों ने तटीय इलाकों में तबाही मचा दी। दक्षिणी सुमात्रा के किनारे स्थित कई इमारतें तबाह हो गईं। सुंदा खाड़ी इंडोनेशिया के जावा और सुमात्रा द्वीप के बीच है। यह जावा समुद्र को हिंद महासागर से जोड़ती है।

इन क्षेत्रों में हुई अधिक तबाही

सुमात्रा के दक्षिणी लामपुंग और जावा के सेरांग और पांदेलांग इलाके में सुनामी का सबसे ज्यादा असर पड़ा। सुनामी की वजह से तटीय क्षेत्र में बनी दर्जनों इमारतें मिट्टी में मिल गई। जियोलॉजिकल एजेंसी सुनामी की वजहों का पता लगाने में जुट गई है। मौतों का आंकड़ा बढ़ सकता है।

सितम्बर में भी आई थी सुनामी

इसी साल सितंबर में इंडोनेशिया के सुलावेसी द्वीप स्थित पालु और दोंगला शहर में भूकंप के बाद सुनामी आने से 832 लोगों की मौत हो गई थी। हजारों लोग घायल हुए थे। कुल छह लाख की आबादी वाले इन दोनों शहरों में आपदा के बाद बीते तीन महीनों से हालात सामान्य नहीं हो पाए हैं।

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इसलिए होती हैं यहां ज्यादा घटनाएं

बता दें कि रिंग ऑफ फायर में स्थित होने के कारण इंडोनेशिया में दुनिया में सबसे अधिक भूकंप और सुनामी आते हैं। अनक क्राकातोआ एक छोटा ज्वालामुखी द्वीप है। यह 1883 में क्राकातोआ ज्वालामुखी के फटने के बाद अस्तित्व में आया था। समुद्र के नीच चट्टानें खिसकने से आई सुनामी ने भी इस बार तबाही मचाई। 2004 में इंडोनेशिया के सुमात्रा में 9.3 तीव्रता का भूकंप आया था।

सुनामी का आंखों देखा हाल बताया

नॉर्वे के पत्रकार ओएस्टीन एंडरसन के मुताबिक, ज्वालामुखी फटने के समय वे करीब के ही एक द्वीप से उसकी फोटो ले रहे थे। इसी दौरान एक 50 से 65 फीट ऊंची लहर तट पर आती दिखी। एंडरसन ने बताया कि उन्हें जान बचाकर होटल की तरफ भागना पड़ा। हालांकि, इसके बाद अगली ही लहर होटल तक पहुंच गई। इसकी चपेट में आने से होटल के बाहर खड़ी कारें पलट गईं।

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