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भारत के सबसे लंबे पुल की ये है खासियत, पीएम मोदी ने किया देश को समर्पित

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को असम के डिब्रूगढ़ में भारत के सबसे लंबे रेल-सड़क ब्रिज का उद्घाटन किया। इस दौरान पीएम मोदी ने खुली जीप में सवार होकर और पैदल इस पुल का को देखा। बताया जा रहा है कि यह पुल केवल आम लोगों के लिए ही नहीं बल्कि देश की सुरक्षा के लिए वायुसेना के भी काम आएगा।

भारत के सबसे लंबे पुल की ये है खासियत, पीएम मोदी ने किया देश को समर्पित
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को असम के डिब्रूगढ़ में भारत के सबसे लंबे रेल-सड़क ब्रिज का उद्घाटन किया। इस दौरान पीएम मोदी ने खुली जीप में सवार होकर और पैदल इस पुल का को देखा। बताया जा रहा है कि यह पुल केवल आम लोगों के लिए ही नहीं बल्कि देश की सुरक्षा के लिए वायुसेना के भी काम आएगा। आज हम आपको इस पुल से जुड़ी कुछ ऐसी ही खास बातों के बारे में बता रहे हैं जो शायद ही आपको पता हों।

कहां बना है पुल

यहा पुल असम के डिब्रूगढ़ में ब्रह्मपुत्र नदी पर बना हुआ है। यह पुल 20 साल की मेहनत का नतीजा है। यब बोगीबील पुल असम समझौते का हिस्सा रहा है। 1997-98 में इस पुल को बनाने के लिए शिफारिश की गई थी। पुल की कुल लंबाई 4.94 किलोमीटर है।
भारत-चीन की सीमा पर रक्षा सेवाओं को पहुंचाने में यह अहम भूमिका निभा सकता है। तत्कालीन प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा ने 22 जनवरी 1997 को इस पुल की आधारशिला रखी थी। लेकिन इस पुल का काम 21 अप्रैल 2002 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में शुरू हुआ था।
इसी कारण पुल का शुभारंभ वाजपेयी जी की वर्षगांठ पर किया गया है। इंजीनिय इस पुल की मजबूती का बखान करने के लिए कहते हैं कि इस पुल पर लड़ाकू विमानों को भी उतारा जा सकता है।

प्रोजेक्ट में देरी के कारण बढ़ी लागत

इस परियोजना को शुरू करने में काफी देरी हुई। जिसके कारण इस पुल को बनाने में 85 प्रतिशत ज्यादा दाम लगा है। शुरुआत में इस पुल की लागत 3230.02 करोड़ थी लेकिन बाद में इस पुल की लागत 5,960 करोड़ हो गई।

देरी के कारण सिर्फ दाम ही नहीं बढ़ा बल्कि पुल की लंबाई भी बढ़ा दी गई। जो पुल पहले 4.31 किलोमीटर बनना था वह बाद में 4.94 किलोमीटर कर दी गई।

परियोजना के रणनीतिक महत्व को देखते हुए केंद्र सरकार ने इस पुल के निर्माण को 2007 में राष्ट्रीय परियोजना घोषित कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि यह ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तरी किनारे पर रहने वाले लोगों की असुविधाओं को कम करेगा। रक्षा क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यह पुल पूर्वी क्षेत्र में सुरक्षा को बढ़ाएगा।

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