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गणतंत्र विशेष: महिलाओं के बलिदान की एक झलक

खुद रोशन होकर दूसरों को भी

रोशन करती महिलाएं

कुछ साल पहले भारतीय गणतंत्र बनने के बाद जहां महिलाओं की स्थिति काफी सुधरी है, वहीं अब भी बहुत सी बातें ऐसी हैं, जिनको हमारे देश में नहीं होना चाहिए। जैसे कि कन्या भ्रूण हत्या, महिलाओं के साथ घरेलू हिंसा, बलात्कार जैसे घटनाएं, गरीबी या जतिवाद का जहर। हमारे गणतंत्र के लिए ये बातें ठीक नहीं हैं। और इन बुराइयों को दूर करने में महिलाएं ही अग्रणी भूमिका निभा सकती हैं। इसके लिए उन्हें आगे आना ही होगा। जिस देश को उन्होंने रात-दिन अपनी मेहनत से सींचा है, उस देश पर कोई भ्रूण हत्या, बलात्कार की घटनाओं के कारण अंगुली उठाए, तो इस बात को इस देश की आधी आबादी, जो महिलाओं की है, वह कभी सह नहीं सकती। एक दिन ऐसा जरूर आएगा जब महिलाएं इन बुराइयों के खिलाफ वैसे ही खड़ी हो जाएंगी, जैसे कि वे गुलामी से लड़ने के लिए हुई थीं, जैसे कि उन्होंने अशिक्षा के अंधकार को दूर भगाया, जैसे कि आत्मनिर्भर होकर वह एक ताकत बनीं और जीवन के अंधेरे को दूर किया। हमारी महिलाओं की यही ताकत है कि वे न केवल खुद रोशनी पाती हैं, बल्कि उससे अपने परिवार, मोहल्ले, नगर और देश को रोशन करती हैं। यही किसी गणतंत्र की, उसके बने रहने की मूल प्रतिज्ञा भी होती है कि वहां के नागरिकों का जीवन खुशहाल हो, देश को बनाने में उनकी रुचि हो। लिंग, धर्म, जाति के आधार पर कोई भेद न हो। सबके समान अधिकार हों।

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