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गणतंत्र विशेष: महिलाओं के बलिदान की एक झलक

घरेलू महिलाओं का योगदान भी देश की तरक्की में भरपूर है।

गणतंत्र विशेष: महिलाओं के बलिदान की एक झलक
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भारतीय गणतंत्र ने महिलाओं को अधिकार देकर जो राह बनाई है, उस पर चलकर वे हर क्षेत्र में अपनी महती भूमिका निभाते हुए देश के विकास को गति दे रही हैं। हालांकि उनके मार्ग मेें बाधाएं कम नहीं हैं, लेकिन उन्होंने अपने हाथों में जो तरक्की की मशाल थाम रखी है, उसकी रोशनी में वे सारे अंधकार तोड़कर मंजिल तक पहुंचने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। गणतंत्र दिवस के अवसर पर देश की आधी आबादी की एक तस्वीर।
26 जनवरी, वह दिन है, जिस दिन हमारा संविधान लागू हुआ। इससे पहले 15 अगस्त 1947 को हम अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त हुए थे। हमारा देश धर्मनिरपेक्ष देश बना। यहां के लोगों और नेताओं ने राज करने के लिए लोकतंत्र का चुनाव किया। लोकतंत्र जहां नागरिकों को पूरी आजादी हो। वे अपना प्रतिनिधि चुन सकें। चाहें तो सरकारें बदल सकें। इसी गणतंत्र ने हमारी देश की महिलाओं को भी वोट की ताकत दी, अपना मनपसंद जनप्रतिनिधि और नेता चुनने की स्वतंत्रता भी। देखने की बात यह है कि अमेरिका में मात्र वोट देने का अधिकार प्राप्त करने के लिए महिलाओं को सत्तर साल तक संघर्ष करना पड़ा था। आज तक वहां कोई महिला राष्ट्रपति भी नहीं बनी। जबकि हमारे देश की इस गणतंत्र की ताकत ही थी कि कई दशक पहले श्रीमती इंदिरा गांधी इस देश की प्रधानमंत्री और महिला हितों की मुखर प्रवक्ता बनी थीं। राष्ट्रपति पद पर श्रीमती प्रतिभा पाटिल आसीन हुर्इं और प्रदेशों की राज्यपाल, मुख्यमंत्री तो न जाने कितनी महिलाएं बनीं और आज भी हैं।
साक्षी है इतिहास
इसमें कोई दो राय नहीं कि हमारी महिलाओं की, इस देश और गणतंत्र को बनाने, उसे सजाने-संवारने और हमेशा चलाए रखने में अहम भूमिका रही है। आजादी के आंदोलन पर नजर डालें, तो क्या गांधी जी की कल्पना बिना कस्तूरबा के की जा सकती है। क्या आज के भारत की परिकल्पना, उसकी तरक्की, विश्व पटल पर उसकी अहमियत बिना महिलाओं के संभव है। क्या महारानी लक्ष्मीबाई, आहिल्याबाई, झलकारी बाई, सरोजिनी नायडू आदि महिलाओं की भूमिका को आजादी के संग्राम में भुलाया जा सकता है?
हर जगह महती भूमिका
अगर आज के भारत की कल्पना हम करें तो शिक्षा, व्यापार, मनोरंजन, विज्ञान, पर्यावरण, कानून, सेना, चिकित्सा, राजनीति, खेती-किसानी, पंचायत आदि सब में जिस तरह से महिलाओं की उपस्थिति है, उसे अनदेखा नहीं किया जा सकता। किसी की उपस्थिति का अर्थ मात्र इतना ही नहीं है कि उसका फोटो कहीं दिख जाए और इस बात की खबर हो जाए कि देखो भई हमारे यहां महिलाएं इन-इन क्षेत्रों में आगे बढ़ी हैं, बढ़ रही हैं। काम कर रही हैं। दरअसल, ऊपर गिनाए क्षेत्र और बहुत से ऐसे क्षेत्र, जहां महिलाएं पृष्ठभूमि में रहती हैं, उनकी मेहनत, निष्ठा और लगन के बिना हमारा समाज-देश चल ही नहीं सकता। परिवार से लेकर व्यापार के रथ के पहिए गति नहीं पा सकते। ज्यों-ज्यों हमारा देश आगे बढ़ा है, इस गणतंत्र ने अपने परचम लहराए हैं, महिलाओं को शिक्षा, रोजगार और आत्मनिर्भरता के अवसर मिले हैं, त्यों-त्यों हमारे देश ने दुनिया में अपने झंडे गाड़े हैं।
आगे की स्लाइड्स में पढ़िए गणतंत्र में घरेलू महिलाओं की भूमिका...
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