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जीएसएलवी ने भरी उड़ान, सफल हुआ पहला चरण

इनसैट-3डीआर की मिशन अवधि 10 साल है।

जीएसएलवी ने भरी उड़ान, सफल हुआ पहला चरण
नई दिल्ली. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने जीएसएलवी-एफ05 का प्रक्षेपण कर लिया है। बता दें कि इस प्रक्षेपण को तकनीकी कमी के चलते करीब 40 मिनट देर बाद अंतरिक्ष में भेजा गया। गौरतलब है कि यह जीएसएलवी के 9 में से 5 की असफलता के बाद यह पहला ऑपरेशनल लॉन्च है। इस प्रक्षेपण के तहत इसरो के अत्याधुनिक मौसम उपग्रह इनसैट-3डीआर को ले जाया जा रहा है। प्रक्षेपण में देरी एनामोली की वजह से की गई है।
सटीकता के साथ किया गया स्थापित
एनडीटीवी की खबर के मुताबिक, जीएसएलवी-एफ05 इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह क्रायोजेनिक अपर स्टेज को ले जाते हुए जीएसएलवी की पहली संचालन उड़ान है। इससे पहले, इसी तरह के विन्यास के साथ जीएसएलवी की उड़ान के साथ जनवरी 2014 में डी5 को और अगस्त 2015 में डी6 को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित कर क्रमश: जीएसएटी-14 और जीएसएटी-6 को लक्षित जीटीओ’ज में पूरी सटीकता के साथ स्थापित किया गया था।
जीटीओ में जाएगा
अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने बताया कि भूस्थितर परिवर्तन कक्षा में पहुंचने के बाद 2,211 किग्रा वजन वाला सैटेलाइट इनसैट-3डीआर अपने प्रोपल्शन सिस्टम की मदद से अंतिम गंतव्य भूसमकालिक कक्षा में पहुंच जाएगा। यह 74 डिग्री पूर्वी देशान्तर पर स्थापित होगा। इनसैट-3डीआर के लक्षित जीटीओ में पहुंचने के बाद सैटेलाइट के सौर पैनल तत्काल तैनात हो जाएंगे।
कर्नाटक से होगा नियंत्रित
कर्नाटक में हासन स्थित इसरो के प्रमुख नियंत्रण केंद्र के पास उपग्रह का नियंत्रण होगा और यह शुरुआती कक्षा संबंधी गतिविधियों को अंजाम देगा और इसे वृत्ताकार भूस्थिर कक्षा में ला देगा। पूर्व में अत्याधुनिक मौसम उपग्रह इनसैट-3डीआर का प्रक्षेपण फ्रेंच गुयाना से 26 जुलाई 2013 को किया गया था। विभिन्न सेवाएं देने के साथ साथ इनसैट-3डीआर तटरक्षक, भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण, जहाजरानी एवं रक्षा सेवाओं सहित विभिन्न उपयोगकर्ताओं के लिए आईएनएसएटी-3डी द्वारा मुहैया करई जाने वाली संचालनगत सेवाओं से संबद्ध हो जाएगा। इनसैट-3डीआर की मिशन अवधि 10 साल है।
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