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इंडियन रेलवे ने लिए ये 6 बड़े फैसले, जानिए यात्रियों पर क्या पढ़ेगा असर

ऑपरेशन स्वर्ण का मकसद राजधानी तथा शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेनों में सेवाओं को सुधारना है।

इंडियन रेलवे ने लिए ये 6 बड़े फैसले, जानिए यात्रियों पर क्या पढ़ेगा असर
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भारतीय रेलवे ने इस साल कई बड़े बदलाव किए है। बता दे कि भारत देश में वैसे तो सभी लोग रेल में यात्रा करते हैं। बताते चलें कि इस साल रेलवे ने अपने आम वजट में विलय करने के बाद सरकार ने भारतीय रेल से जुड़ी 6 महत्वपूर्ण योजनाओं की घोषणा की थी।

जिससे यात्रियों को ट्रेन में और अधिक सेवाएं मिल सकें। बताते चले कि रेलवे ने 6 ऐसे महत्वपूर्ण डेवेलपमेंट का ऐलान किया था जो सीधे आपकी सुरक्षा, सुखद रेल सफर और जरूरतों से जुड़े हैं।

1- ऑपरेशन स्वर्ण’ के तहत इन ट्रेनों का किया जाएगा बदलाव

बता दे की कई बर्षों से यात्री शताब्दी और राजधानी, ट्रेनों की कई सालों से शिकायत कर रहे थे। यात्रियों से कई साल तक शिकायत सुनने के बाद अब जाकर रेल मंत्रालय इन ट्रेनों के बदाव की तैयारी की है।

बताते चले कि रेल मंत्रालय ‘ऑपरेशन स्वर्ण’ शुरू करने की तैयारी में लगा है, ऑपरेशन स्वर्ण का मकसद राजधानी तथा शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेनों में सेवाओं को सुधारना है।

पहले चरण के तहत, अपग्रेड करने के लिए मुंबई-दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस तथा मुंबई-अहमदाबाद शताब्दी एक्सप्रेस का चयन किया गया है। इस काम की शुरूआत रेल मंत्रालय 26 सितंबर को करने जा रहा है।

2- रेलवे परिसर में खुलेंगे जन औषधि केंद्र

पूरे देश में रेलवे अपने परिसरों में जन औषधि केंद्रों को खोलने की अनुमति देगा। ताकि आम आदमी को प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना के तहत सस्ती दवाएं उपलब्ध हो सकें।

बता दे सरकार ने जन औषधि अभियान की शुरुआत इस लिए की ताकि लोगों को सस्ती दर पर अच्छी दवाएं उपलब्ध की जाएं। ये दवाएं प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्रों के माध्यम से बेची जानी हैं।

रेलवे औषधि विभाग के साथ समझौता कर रेल परिसरों में दुकानें खोलेगा। रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा, हमने रेलवे स्टेशनों, दवा दुकानों, कार्यशालाओं और रेल परिसर में जहां भी संभव है जन औषधि केंद्र बनाने का निर्णय किया है। प्लेटफॉर्म और अन्य रेल परिसरों में दवा दुकान खोलने के तौर तरीके पर काम किया जा रहा है।

3- व्‍यापारियों के लिए रात में चलने वाली ‘डबल डैकर उदय एक्‍सेप्रस

रेलवे यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में लगा है। भारतीय रेल अब उद्यागपतियों को आकर्षित करने के लिए जल्दी ही आधुनिक सुविधाओं से युक्त एक रात की डबल-डेकर रेल सेवा शुरू करेगी करने जा रही है।

रेलवे की नई सेवा का मकसद उदय एक्सप्रेस के जरिये महानगरों को जोड़ने का है। उद्योग मंडल फिक्की द्वारा पिछले दिनों बताया गया था, कि हम व्यापारियों की यात्रियों के लिए उदय एक्सप्रेस शुरू करेंगे।

इस ट्रेन के जरिए यात्री का सफर रात से शुरू होगा और में और सुबह तक अपने गंतव्य पर पहुंच जाएंगे, ताकि उद्यागपति अपनी होटल के होने वाले खर्च को बता सकें।

4- रेल यात्रा के दौरान इंटरनेट संबंधी कनेक्टिविटी को बनाया जाएगा बेहतर

रेल यात्री अब रेल में सफर के दौरान बेहतर इंटरनेट का लुफ्त उठा सकेंगे। क्योंकि रेलवे यात्रियों के लिए अब जल्द ही नेट कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने जा रहा है। रेलवे मुख्य मार्गों को उच्च गति मोबाइल कम्यूनिकेशन से लैस करने की तैयारी कर चुका है।

इससे न केवल पटरियों की हालत के बारे में गैंगमेन, लोको पायलट और स्टेशन मास्टर के बीच सीधा संपर्क स्थापित होगा बल्कि रेलवे की संपत्तियों पर समय से निगरानी रखने में भी मदद मिलेगी।

रेल अभियान को बदलने के लिए इस क्षेत्र को जरूरी मानते हुए रेलवे उच्च गति मोबाइल कम्यूनिकेशन कॉरिडोर स्थापित कर रहा है। इस पर पब्लिक पार्टनरशिप मॉडल की मदद से 5,000 करोड़ खर्च किया जाएगा।

बता दे मौजूदा समय में रेलवे इस एप्लीकेशन के संचालन के लिए वायरलेस सिस्टम का प्रयोग करता आ रहा है। रेलवे ने कुछ चयनित मार्गों पर ट्रेन चालक और ट्रेन कंट्रोलर के बीच वॉयस कम्यूनिकेशन के लिए जीएसएम-आर नेटवर्क लगाया था।

5- रेलवे ने ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने के लिये 18000 करोड़ रुपये मंजूरी दी है

दिल्ली-मुंबई और दिल्ली- हावड़ा रेल गलियों में ट्रेनों की गति बढ़ाने के लिये महत्वकांक्षी 18,000 करोड़ रुपये की परियोजना को नीति आयोग की मंजूरी मिल गयी है। इसे अब मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिये रखा जाएगा।

यह बड़ी परियोजना रेल परिचालन में बड़ा बदलाव लाएगी और भारतीय रेलवे नेटवर्क के इन व्यस्त मार्गो पर ट्रेनों का परिचालन 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हो सकेगा।

6- रेल दुर्घटना रोकने के लिए 3330 किलोमीटर तक आधुनिक सुरक्षा तंत्र

आप को बता दे भारतीय रेलवे कुल 3330 km में ट्रेन प्रोटेक्शन एंड वॉर्निंग सिस्टम (टीपीडब्ल्यूएस) लगाने जा रही है जिससे खास खंडों में रेलगाड़ी से यात्रा करना पहले से अधिक सुरक्षित और तेज हो जाएगा।

इसके लिए करीब 2000 करोड़ रूपए की लागत आएगी। दुर्घटना रोकने वाला यह आधुनिक तंत्र दो चरणों में तीन से चार वर्ष में लागू हो जाएगा। रेलवे ने इस तंत्र को पायलट प्रोजेट के तौर पर कुछ वर्ष पहले कुछ खास खंडों में शुरू किया था।

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