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Exclusive Interview: आंधी-तूफान को लेकर मौसम विभाग के DG ने किया ये बड़ा खुलासा

मानसून के आगमन से पहले यानि प्री-मानसून सीजन में ऐसे थंडरस्टॉर्म आते रहते हैं। यह असामान्य स्थिति नहीं है। सीजन के हिसाब से इन्हें काल बैसाखी (थंडरस्ट्रॉम) के नाम से जाना जाता है। आने वाले दो-तीन दिनों में पहाड़ी राज्यों (उत्तराखंड, हिमाचल-प्रदेश, जम्मू-कश्मीर), पंजाब, हरियाणा के कुछ मैदानी इलाकों में आंधी, तूफान व बारिश होगी। इसके अलावा केंद्रीय भारत के मध्य-प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भी स्थानीय थंडरस्टॉर्म आने की संभावना है।

Exclusive Interview: आंधी-तूफान को लेकर मौसम विभाग के DG ने किया ये बड़ा खुलासा
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देश में मई के महीने में अचानक बदले मौसम के मिजाज (थंडरस्ट्रॉम) का मानसून पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इस सीजन में बारिश न केवल बहुत अच्छी होगी। बल्कि मात्रात्मक रुप से उसका वितरण भी किसानों के लिए बहुत लाभदायक रहेगा। जिससे उनकी पैदावार में इजाफा होगा। आंकड़ों के हिसाब से मानसून के दौरान 97 फीसदी बारिश होगी। यह जानकारी भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के महानिदेशक डॉ के.जे रमेश ने हरिभूमि को दिए विशेष साक्षात्कार में दी। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश।

इस साल मानसून सीजन में बारिश कैसी होगी?

मानसून सीजन में बारिश को लेकर आम नागरिकों और किसानों को घबराने की बिलकुल जरुरत नहीं है। इस दौरान बहुत अच्छी बारिश होगी। वर्ष 2016 से मानसून के दौरान देश में अच्छी बारिश हो रही है। यह सिलसिला पिछले साल 2017 में भी चला था और इस वर्ष 2018 में भी जारी रहेगा। मई के महीने में हो रहे मौसमी बदलावों का मानसून के आगमन से लेकर प्रस्थान और बारिश की मात्रा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

मई के दौरान इतने थंडरस्ट्रॉम क्यों आ रहे हैं। यह सिलसिला कब तक चलेगा?

मानसून के आगमन से पहले यानि प्री-मानसून सीजन में ऐसे थंडरस्टॉर्म आते रहते हैं। यह असामान्य स्थिति नहीं है। सीजन के हिसाब से इन्हें काल बैसाखी (थंडरस्ट्रॉम) के नाम से जाना जाता है। आने वाले दो-तीन दिनों में पहाड़ी राज्यों (उत्तराखंड, हिमाचल-प्रदेश, जम्मू-कश्मीर), पंजाब, हरियाणा के कुछ मैदानी इलाकों में आंधी, तूफान व बारिश होगी। इसके अलावा केंद्रीय भारत के मध्य-प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भी स्थानीय थंडरस्टॉर्म आने की संभावना है। इससे इन तमाम जगहों पर तापमान में गिरावट दर्ज होगी। पहाड़ों पर बारिश होने से राजधानी के मौसम के मिजाज पर भी असर पड़ेगा।

जलवायु परिवर्तन की वजह से मौसम में यह बदलाव हो रहा है?

उत्तर- हां जलवायु परिवर्तन भी इस बदलाव के पीछे की एक वजह है। क्योंकि सीजनल तापमान सामान्य से ज्यादा हो गया है। यह सिलसिला बीते चार से पांच दशक से चल रहा है। यह बदलाव केवल भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया में हो रहे हैं। इसके पीछे कारण औद्योगिकीकरण की वजह से बढ़े कार्बन उत्सर्जन की मात्रा भी है। जिससे हमारे समुद्र .5 डिग्री और जमीन की सतह .86 डिग्री गर्म हो गई है। यह बदलाव भारत में बीते 6 दशक में हुए हैं। आने वाले समय में इनकी भयावहता न बढ़ने देने के लिए हम नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की ओर बढ़ रहे हैं। लेकिन इस प्रक्रिया में तेजी लाए जाने की जरुरत है।

थंडरस्ट्रॉम में जान-माल का नुकसान बचाने के लिए आईएमडी के पास क्या योजना है?

उत्तर- थंडरस्ट्रॉम में जान-माल का नुकसान रोकने के लिए कुछ जरुरी बिंदुओं पर हाल ही में राज्यों से चर्चा हुई है। इसमें विभाग लोगों को यह बताना चाहता है कि आंधी-तूफान को आने में 40 मिनट का समय लगता है। पहले आसमान में काले बादल छा जाते हैं। उसके बाद हवाएं चलती हैं। इस तरह की गतिविधि की शुरुआत के वक्त ही लोग खासकर कच्चे, छप्पर-खपरैल, टीन के शेड वाले मकानों में रहने वाले लोग अपने घरों से बाहर निकलकर किसी मजबूत शेड के नीचे चले जाएं। पेड़ के नीचे, बिजली के खंभों के आसपास खड़े न हो। क्योंकि यह आसमानी बिजली को आकर्षित करते हैं। रात के समय में टीवी, रेडियो के जरिए मौसम के बारे में जानकारी लेकर ही सोने जाएं। ऐसा करने से नुकसान नहीं होगा। ज्यादातर तूफान-आंधी दिन के समय में यानी तीन बजे के बाद ही आते हैं। जब मौसम में गर्मी होती है। इनका असर तीन-चार घंटे तक रहता है। स्ट्रॉम को लेकर विभाग 24 से 48 घंटे की चेतावनी पीला (स्ट्रॉम आएगा), संतरी (50 से 70किमी़ की रफ्तार से हवाएं चलेंगी) और लाल रंग (70 किमी़ से ज्यादा रफ्तार से हवाएं चलेंगी) की बारकोडिंग के जरिए भविष्यवाणी जारी कर रहा है।

किसानों को मौसम विभाग की भविष्यवाणी का शत-प्रतिशत लाभ कैसे मिलेगा?

किसानों तक मौसम की भविष्यवाणी पहुंचाने के लिए विभाग ग्रामीण कृषि मौसम सेवा कार्यक्रम के जरिए संदेश भेज रहा है। अभी तक 22 मिलियन किसानों तक एसएमएस के रुप में हफ्ते में दो बार (मंगलवार, शुक्रवार) अगले चार दिनों के लिए मौसमी भविष्यवाणी की जानकारी दी जाती है। यह हिंदी, अंग्रेजी और स्थानीय भाषा में होती है। इसके अलावा सप्ताह के अंत में अगले 15 दिनों के लिए नेशनल एडवाइजरी भी जारी होती है। यह कवायद 130 एग्रोमेट फोरकॉस्टिंग यूनिटों के जरिए की जा रही है। हर यूनिट में 5 से 6 जिले आते हैं। इनकी मौसमी जानकारी भविष्यवाणी में की जाती है। अभी यह चार मुख्य फसलों पर आधारित है। आईएमडी चाहता है कि इसका फायदा 650 जिलों में मौजूद किसानों तक पहुंचे। केंद्र सरकार की ओर से विभाग को देश की 22 प्रमुख फसलों को लेकर किसानों के लिए मौसमी भविष्यवाणी करने की सिफारिश की गई है। जल्द ही 22 फसलों के साथ भी हमारे पूर्वानूमान किसानों तक पहुंचने शुरु हो जाएंगे। इससे 94 मिलियन किसानों तक मौसम की सटीक जानकारी पहुंचेगी।

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