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जानें PAK की कैद से वाजपेयी सरकार ने किस तरह से पायलट नचिकेता को कराया था रिहा

पाकिस्तान ने वायुसेना एक फाइटर जेट को क्षति पहुंचाई और एक पायलट अभिनन्दन पाकिस्तान की कस्टडी में हैं। भारत ने पाकिस्तान से अपने बहादुर पायलट को छोड़ने की अपील की है।

जानें PAK की कैद से वाजपेयी सरकार ने किस तरह से पायलट नचिकेता को कराया था रिहा
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भारत और पाकिस्तान के बीच 1999 में हुए कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना के पायलट के. नचिकेता पाकिस्तान आर्मी की गिरफ्त में आ गए थे। जिन्हें एक हफ्ते के बाद पाकिस्तान ने रिहा कर दिया था। बुधवार को पाकिस्तान की एयर फोर्स ने एलओसी पर सीजफायर का उल्लंघन किया। जिसके जवाब में भारतीय सेना ने पाकिस्तान के F-16 फाइटर जेट को मार गिराया। लेकिन पाकिस्तान ने वायुसेना एक फाइटर जेट को क्षति पहुंचाई और एक पायलट अभिनन्दन पाकिस्तान की कस्टडी में हैं। भारत ने पाकिस्तान से अपने बहादुर पायलट को छोड़ने की अपील की है। तो ऐसे में हम जानते हैं कि पाकिस्तान की कस्टडी से वायुसेना के नचिकेता कैसे रिहा होकर भारत लौटे थे।

कैप्टन के. नचिकेता इस तरह लगे पाकिस्तान आर्मी के हाथ

भारत और पाकिस्तान के बीच 1999 में हुए कारगिल युद्ध के दौरान कैप्टन के. नचिकेता को 'ऑपरेशन सफेद सागर' में फाइटर जेट MIG- 27 उड़ाने को उड़ाने की जिम्मेदी दी गई थी। बताया जाता है कि 17,000 फीट की ऊंचाई पर उनके फाइटर जेट MIG- 27 कुछ तकनीकि खराबी आई और वह क्रैश हो गया। जिसके बाद पाकिस्तान की आर्मी ने के. नचिकेता को अपनी कस्टडी में ले लिया था। जब कैप्टन नचिके भारत लौटे तो उन्होंने बताया था कि भारतीय सेना के बारे में जानकारी के लिए पाक आर्मी ने मानसिक और शारीरिक रूप से टॉर्चर किया था।

कैप्टन के. नचिकेता की इस तरह हुई रिहाई

के. नचिकेता के मुताबिक भारतीय वायुसेना के पायलट के. नचिकेता की रिहाई में जी पार्थसारथी का हाथ था। उस समय भारत के जी पार्थसारथी पाकिस्तान में उच्चायुक्त थे इन्होंने ही पायलट की रिहाई की पाकिस्तान सरकार से बातचीत की थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान में भारत के पूर्व उच्चायुक्त जी पार्थसारथी ने बताया था कि मुझे विदेशी कार्यालय से फोन आया था और कहा गया था कि मैं वहां से अपने पायलट को लेकर आऊं। क्योंकि पाकिस्तान के पूर्व पीएम नवाज शरीफ ने नचिकेता की रिहाई की घोषणा कर चुके थे।

जिस समय नचिकेता की रिहाई की घोषणा की गई उस समय पाकिस्तान शोर मचाकर ये साबित करना चाहता था कि उसने दरियादिली दिखाई है। उन्होंने यहा भी कहा कि मुझे विदेश मंत्रालय कार्यलाय में चल रही प्रेस कॉफ्रेंस में बुलाने के लिए कहा गया लेकिन मैंने जाने से साफ इनकार कर दिया और कहा कि मैं अपने पायलट का मजाक बनाने के लिए कार्यालय में नहीं जाऊंगा।

युद्ध में गिरफ्तार किए गए सैनिकों के लिए नियम

भारत में पाकिस्तान ने जेनेवा संधि (Geneva Convention) के तहत व्यवहार करने के लिए कहा गया है। जिनेवा संधि के मुताबिक युद्धबंदी के साथ अमानवीय बर्ताव, डराया धमकाया और किसी भा तरह का दवाब नहीं बनाया जा सकता है। अब पाकिस्तान की जिम्मेदारी थी कि वे भारतीय पायलट को जेनेवा संधि को सौंपे। लेकिन जेनेवा संधि में युद्धबंदियों के अधिकारों को बरकरार रखने के लिए कई नियम दिया गए हैं।

जेनेवा संधि के नियम

* जेनेवा संधि के तहत घायल सैनिक की उचित देखरेख की जाएगी।

* जेनेवा संधि के तहत उन्हें खाना-पीना और युद्ध की सभी जरूरी चीजें मुहैया कराई जाएगी।

* जेनेवा संधि के मुताबिक किसी भी युद्धबंदी को प्रताणित नहीं किया जा सकता।

* किसी देश का सैनिक जैसे ही पकड़ा जाता है वह इस संधि के तहत आ जाता है।

* जेनेवा संधि के मुताबिक उसे डराया-धमकाया नहीं जा सकता।

* जेनेवा संधि के मुताबिक युद्धबंदी से उसकी जाति, धर्म, जन्म आदि के बारे में नहीं पूछा जा सकता।

* साथ ही पकड़े गए सैनिकों पर या तो मुकदमा चलाया जाएगा या फिर किसी भी युद्ध के बाद उन्हें रिहा कर दिया जाएगा।

इसी नियम के मुताबिक पाकिस्तान के द्वारा भारत के कैप्टन के. नचिकेता को एक हफ्ते के अंदर रिहा कर भारत को वाघा बॉर्डर के रास्ते सौंप दिया गया था। वाघा बॉर्डर से भारत में प्रवेश करने पर तत्कालीन राष्ट्रपति के आर नारायण और प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने के. नचिकेता का स्वागत किया था।

बता दें कि लगभग 20 साल में यह स्थिति एक बार फिर सामने आई है। मंगलवार को पाकिस्तान ने एक भारतीय एयरक्राफ्ट पायलट अभिनंदन को कस्टडी में लिया है। पाकिस्तान भारत को आश्वासन दिया है कि पायलट के साथ मानवीय व्यवहार किया जाएगा। वहीं भारत ने पाकिस्तान से जल्द से जल्द हमारे पायलट को वापस लौटा देने की अपील की है। साथ ही कहा कि जेनेवा संधि के तहत व्यवहार किया जाना चाहिए।

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