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भारतीय डॉक्टरों ने मरीज के आंत से निकाले बम के अंश, 7 सालों में इराक और जॉर्डन में करवा चुका था 21 सर्जरी

इराक युद्ध के दौरान बम ब्लास्ट में घायल हुए 55 वर्षीय इराकी व्यक्ति की यहां पारस हॉस्पिटल में सर्जरी की गई। चिकित्सकों ने उसके पेट से सफलता पूर्वक ब्लास्ट के अंश को निकाला और पेट के एक महत्वपूर्ण हिस्से का पुननिर्माण किया।

भारतीय डॉक्टरों ने मरीज के आंत से निकाले बम के अंश, 7 सालों में इराक और जॉर्डन में करवा चुका था 21 सर्जरी
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इराक युद्ध के दौरान बम ब्लास्ट में घायल हुए 55 वर्षीय इराकी व्यक्ति की यहां पारस हॉस्पिटल में सर्जरी की गई। चिकित्सकों ने उसके पेट से सफलता पूर्वक ब्लास्ट के अंश को निकाला और पेट के एक महत्वपूर्ण हिस्से का पुननिर्माण किया। अनस हसन अहमद अल्सादानी का सात वर्ष पूर्व बम ब्लास्ट में शरीर के दाएं हिस्से को काफी नुकसान हुआ था, पेट का एक बड़ा हिस्सा डैमेज हो गया था। उनका प्राथमिक रिपेयर इराक में हुआ था। उसके बाद वह इलाज के लिए जॉर्डन गए थे जहां उनके 21 सर्जिकल प्रॉसीजर किए गए। पारस हॉस्पिटल, गुडगांव में उनका इलाज डॉ. राकेश दुरखरे, सीनियर कंसल्टेंट, जनरल एंड लैप्रोस्कोपिक सर्जरी विभाग, और डॉ. आलोक गुप्ता, सीनियर कंसल्टेंट, जनरल एंड लैप्रोस्स्कोपिक सर्जरी विभाग, पारस हॉस्पिटल द्वारा किया गया।

डॉ. राकेश दुरखरे, सीनियर कंसल्टेंट, जनरल एंड लैप्रोस्कोपिक सर्जरी विभाग, पारस हॉस्पिटल ने पत्रकारों को बताया कि यह एक दिल दहला देने वाला मामला था जो युद्ध की व्यथा और लोगों के जीवन पर पडने वाले इसके भयावह असर को बयाँ करता है। मरीज की 21 बार सर्जरी हुई थी बावजूद इसके उनके पेट में कोई बाहरी चीज छूट गई थी। उन्हे भारत लाया गया था तब हालत ऐसी थी कि जैसे उनके पेट के दाएँ हिस्से और पीठ में कोई मांसपेशी ही न बची हो। जॉर्डन के डॉक्टरों ने इस हिस्से को 9 मेश लगाकर पुनर्निर्मित किया था। तमाम इलाज के बावजूद, ब्लास्ट का एक अंश उनकी आंत में छूट गया था। बार-बार आंत की सर्जरी होने से एक इंटरक्युटेनियस फिस्ट्युला विकसित हो गया था। डॉ. आलोक गुप्ता ने कहा कि, हमें यह सर्जरी करने में 6.5 घंटे का समय लगा। जिसके तहत हमने पेट की कैविटी में एक सर्जिकल चीरा लगाया, इसके बाद पेट के बीमारी वाले हिस्से को बम के अंश के साथ बाहर निकाला। पहले लगाए गए मेश के संक्रमित हिस्से को हटाने के बाद पेट को रीकंस्ट्रक्ट करना दूसरी चुनौती थी। हमे बेहद खुशी है कि हम इस प्रॉसीजर को सफलतापूर्वक करने में सफल हुए जिससे मरीज के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में मदद मिलेगी।

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