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सेना ने आतंकियों को जड़ से उखाड़ने के लिए बनाया ये मास्टर प्लान

हालात सामान्य करने के लिए आतंकियों को मार गिराया जाना जरूरी है।

सेना ने आतंकियों को जड़ से उखाड़ने के लिए बनाया ये मास्टर प्लान
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बीते वर्ष जुलाई में पाक समर्थित आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन (एचएम) के युवा कमांडर बुरहान वानी के सैन्यबलों के साथ मुठभेड़ में मारे जाने के बाद से पाकिस्तान द्वारा सूबे की अशांति भंग करने की कोशिश विफल होती हुई नजर आ रही है।

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राज्य में तैनात सुरक्षा बलों की मुस्तैदी की वजह से भारत-पाक नियंत्रण रेखा (एलओसी) से लेकर कश्मीर घाटी के अंदर आतंकवादियों के नापाक मंसूबों को लगातार नेस्तनाबूद किया जा रहा है और अब इसमें सेना की एक बेहद खास त्रिस्तरीय रणनीति भी शामिल हो गई है, जिससे जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद का नामो-निशान जड़ से उखाड़ फेंका जाएगा।

ऐसा है रणनीति की खाका

यहां सेना के उच्चपदस्थ सूत्रों ने हरिभूमि को बताया कि इसमें कोई शक नहीं है कि एलओसी से लेकर कश्मीर के अंदर हमारे आतंकवाद रोधी अभियान (सीआईऑप्स) तेजी से जारी रहेंगे। इन्हें और मजबूती देने के लिए हमने इसमें एक अलग त्रिस्तरीय रणनीति को शामिल किया गया है।

इसमें सेना का सबसे पहले चरण में काम भारत की पाकिस्तान से लगी लगभग 778 किलोमीटर लंबी एलओसी से आतंकियों की घुसपैठ को रोकना होगा। क्योंकि अगर घुसपैठियों को एलओसी पर ही रोक दिया गया तो वो राज्य में प्रवेश कर उसकी शांति को भंग नहीं कर सकेंगे। दूसरे चरण में जम्मू-कश्मीर में स्थानीय स्तर पर आतंकी संगठनों में होने वाली भर्ती पर रोक लगाई जाएगी।

तीसरी और अंतिम चरण में सेना लगातार सीआईऑप्स के जरिए सूबे में आतंकियों की संख्या को कम करेगी। जिससे ये राज्य सरकार पर हावी न हो और उसकी दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों को प्रभावित न कर सकें। आमतौर पर कश्मीर में यह चलन देखने को मिलता है कि आतंकियों की तादाद बढ़ने के साथ ही वो सरकार के कामकाज से लेकर सामान्य जनजीवन सीधे प्रभावित करने लगते हैं।

इसमें आतंकी जन समर्थन जुटाने के लिए लोगों को पत्थरबाजी करने के लिए उकसाते हैं और कभी स्कूल-कॉलेजों को जला देते हैं। इससे लोगों में दहशत पैदा होती है और माहौल खराब होता है। शनिवार को मारे गए आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन के नए कमांडर सबजार भट्ट के सेना के साथ मुठभेड़ में मारे जाने के बाद घाटी के हालात नाजुक बने हुए हैं।

इस बार पाक ने रजमान के पवित्र महीने की शुरूआत में सूबे में आतंकवाद फैलाकर उसकी शांति भंग करने का नापाक खेल खेलना शुरू कर दिया है। लेकिन सेना की कार्रवाई आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए घाटी में चलाई जा रही पाक की छद्म युद्ध की इस चाल को नाकाम करने के लिए बेहद जरूरी है व लगातार जारी रहेगी।

पांच जिलों पर रहेगी पैनी नजर

सेना का मानना है कि कश्मीर घाटी में पांच ऐसे जिले हैं, जिनके हालात आतंकवाद के लिहाज से बेहद चिंताजनक बने हुए हैं। इसमें पुलवामा, शोपियां, कुलगाम, अनंतनाग और बांदीपुरा मुख्य रूप से शामिल है। रक्षा विशेषज्ञ इन जिलों का झुकाव पाकिस्तान की ओर मानते हैं।

हर शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद यहां कभी पाक तो कभी आतंकी संगठन आईएसआईएस के झंडे लहराकर सेना व केंद्र सरकार का विरोध किया जाता है। बीते कुछ दिनों से यह ट्रेंड भी देखने को मिल रहा है कि मस्जिद से घोषणा होने के बाद पत्थरबाजी शुरू हो जाती है।

लेकिन इसमें सेना व सुरक्षाबलों द्वारा चलाए जा रहे अभियानों, संदिग्धों की धरपकड़ और उनके खिलाफ मामले दर्ज किए जाने से कमी होती हुई भी नजर आ रही है। बीते कुछ समय से इस सूची में सबे का एक अन्य जिला गांदरबल भी शामिल हो गया है। यहां भी आतंकी गतिविधियों की मौजूदगी के संकेत मिलने लगे हैं।

150 आतंकी मौजूद

आंकड़ों के हिसाब से कश्मीर के अंदर कुल करीब 200 आतंकियों की मौजूदगी बनी हुई है। इसमें जनवरी से लेकर अब तक करीब 50 आतंकियों को सुरक्षाबलों ने एलओसी से घुसपैठ से लेकर घाटी के अंदर अलग-अलग मुठभेड़ों में मार गिराया है।

वहीं आतंकियों से हुई इन तमाम मुठभेड़ों में करीब 25 सुरक्षाबल भी शहीद हुए हैं। 150 के इस आंकड़ें में करीब 60 आतंकी स्थानीय हैं।

सेना का मकसद जम्मू-कश्मीर में शांति बहाली कायम कर युवाआें को विकास, शिक्षा और रोजगार की ओर प्रेरित करना है। इसी से वो बंदूक और पत्थर छोड़कर देश की मुख्यधारा में शामिल हो सकते हैं।

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