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सेना प्रमुख ने शहीद सैनिकों के बच्चों के लिए की ये अपील, रक्षा मंत्री ने दिया ये जवाब

भारतीय नौसेना प्रमुख सुनाल लांबा ने भी रक्षा मंत्री को खत लिखा था।

सेना प्रमुख ने शहीद सैनिकों के बच्चों के लिए की ये अपील, रक्षा मंत्री ने दिया ये जवाब

1971 युद्ध के बाद तत्कालीन सरकार ने एक नियम पेश किया था जिसके अनुसार अगर कोई जवान अपनी ड्यूटी के दौरान अपनी जवान गंवाता है या फिर लापता या दिव्यांग हो जाता है तो उसके बच्चों के स्कूल, हॉस्टल, ट्यूशन, किताब और कपड़ों आदि का खर्च सरकार उठाएगी।

हाल ही में मोदी सरकार ने ये फैसला लिया था कि इस खर्च को 10 हजार प्रति माह तक सीमित कर दिया जाएगा। सरकार का ये आदेश 1 जुलाई 2017 से लागू है। इस फैसले से शहीद सैनिकों के 3400 बच्चे प्रभावित हुए।
नौसेना प्रमुख सुनील लांबा ने रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण को खत लिखकर पुरानी व्यवस्था लागू करने की अपील की है ताकि जवानों के परिजनों को राहत मिल सके।
इस पर रक्षा मंत्री ने कहा कि ये फैसला 7वें वेतन आयोग द्वारा लिया गया था और कैबिनेट ने इसे पास किया था। हम फिर से इसपर विचार करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार कभी भी सैनिकों की इच्छा के खिलाफ नहीं थी।
सेना प्रमुख बिपिन रावत ने इस मुद्दे पर कहा कि हमने इस बारे में रक्षा मंत्री को लिखा था और उन्हें समझाया कि कुछ मामलों में वाकई ज्यादा वेतन मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्री इस मामले को लेकर चिंतित हैं और इसपर प्राथमिकता से विचार करेंगी।
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