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म्यांमार सीमा पर सेना की सर्जिकल स्ट्राइक, कई उग्रवादी कैंप तबाह

दो वर्षों सेना ने दो बार सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया है।

म्यांमार सीमा पर सेना की सर्जिकल स्ट्राइक, कई उग्रवादी कैंप तबाह

भारत-म्यांमार सीमा पर बुधवार सुबह तड़के पौने पांच बजे सेना ने पूर्वोत्तर में सक्रिय उग्रवादी संगठन नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड (खापलांग) के खिलाफ बड़ी जवाबी कार्रवाई करते हुए संगठन को भारी नुकसान पहुंचाया है।

यहां सेना के सूत्रों के कहा कि उसकी यह कार्रवाई सीमा से सटे पूर्वी नागालैंड के मॉन गांव में हुई। जिसमें शामिल सेना की टुकड़ियों में किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। सेना ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई कोई सर्जिकल स्ट्राइक नहीं थी और इसके लिए उसने अंतरराष्ट्रीय सीमा को पार भी नहीं किया है।

यह भारतीय सीमा में सेना द्वारा किया गया एक प्रकार का आतंकवाद रोधी अभियान (एंटी-टेरर ऑपरेशन) है। गौरतलब है कि बीते दो वर्षों के दौरान सेना ने आतंकवादियों के सफाए के लिए दो बार देश की सीमा पार करके सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया है।

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इसमें एक बार पाकिस्तान से लगी पश्चिमी सीमा पर सेना की विशेष टुकड़ी ने भारत-पाक नियंत्रण रेखा (एलओसी) को पार कर आतंकियों को सबक सिखाया।

दूसरी कार्रवाई 2015 में पूर्वोत्तर में मणिपुर में सेना के विशेष कमांड़ो दस्ते के द्वारा अंतरराष्ट्रीय सीमा लांघकर एनएससीएन (के) के आतंकी शिविरों पर हमला किया गया था। सेना की तरफ से मारे गए उग्रवादियों के बारे में कोई आंकड़ा जारी नहीं किया गया है।

घटना के वक्त सेना के कुल करीब 12 जवानों की टुकड़ी नागालैंड में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर नियमित गश्त के लिए निकली हुई थी कि अचानक एनएससीएन (के) के उग्रवादियों के दल ने उनपर गोलीबारी शुरू कर दी।

इसके जवाब में सेना ने भी जवाबी गोलीबारी की। इसे देखकर उग्रवादियों ने गोलीबारी करना रोक दिया और वह मौके से फरार हो गए। इस पूरे घटनाक्रम में एनएससीएन (के) उग्रवादियों को काफी नुकसान उठाना पड़ा है।

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