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भारतीय सेना की ताकत बढ़ाने के लिए मोदी सरकार का बड़ा फैसला, गल जाएंगे दुश्मन के टैंक

भारत लगातार अपनी सैन्य ताकत बढ़ रहा है ताकि दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके। सरकार वायु सेना की ताकत में और इजाफा करना चाहती है। इसी के तहत राफेल के बाद अब फ्रांस सरकार ने एक और डील होने जा रही है। इसके तहत वायुसेना को फ्रांस से करीब 3 हजार मिलान 2टी एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल खरीदने की योजना है।

भारतीय सेना की ताकत बढ़ाने के लिए मोदी सरकार का बड़ा फैसला, गल जाएंगे दुश्मन के टैंक
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भारत लगातार अपनी सैन्य ताकत बढ़ रहा है ताकि दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके। सरकार वायु सेना की ताकत में और इजाफा करना चाहती है। इसी के तहत राफेल के बाद अब फ्रांस सरकार ने एक और डील होने जा रही है। इसके तहत वायुसेना को फ्रांस से करीब 3 हजार मिलान 2टी एंटी-टैंक गाइडेड (Anti Tank Guided Missile) मिसाइल खरीदने की योजना है।
इस डील कीमत करीब 1000 करोड़ रुपए मानी जा रही है। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि इस संबंध में जल्द ही उच्च स्तरीय वार्ता बैठक में निर्णय लिया जाएगा। गौरतलब है कि सेना को इस वक्त करीब 70 हजार एंटी टैंक गाइडेड मिसाइलों की जरूरत है। इनका इस्तेमाल दुश्मन सेना की टैंक रेजीमेंट से मुकाबले के लिए किया जा सकता है। सेकंड जेनरेशन की ये मिसाइलें टैंक को तबाह करने में कारगर होंगी।

भारत डायनैमिक्स लिमिटेड ही बनाती है मिलान-2

बता दें कि मिलान-2 फ्रांस की एक सेकंड जेनरेशन एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल है, जो कि हिंदुस्तान में ही भारत डायनैमिक्स लिमिटेड फांस की कंपनी के साथ मिलकर बनाती है। इस मिसाइल का टारगेट करीब 2 किलोमीटर पर होता है। उल्लेखनीय है कि भारत ने इजरायल से एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल लेने का प्रस्ताव रद कर दिया था, क्योंकि अपने ही देश में इस दिशा में काम चल रहा था।

जरूरत थर्ड जेनरेशन की , खरीद रहे सेकंड जेनरेशन

सेना को फिलहाल 70 हजार एंटी टैंक मिसाइलों के अतिरिक्त 850 लांचर्स की जरूरत है। उसकी योजना थर्ड जेनरेशन की एंटी टैंक मिसाइलों को खरीदने की है, लेकिन इसमें वक्त लग सकता है। इन्हें अभी भारत में ही विकसित करने का काम चल रहा है। 2टी एंटी टैंक गाइडेड मिसाइलें मिलने से सेना की जरूरत काफी हद तक पूरी हो जाएगी।

देश की आकाश मिसाइल पर ही सरकार को भरोसा

डीआरडीओ मैन-पोर्टेबल एंटी टैंक मिसाइलों के दो ट्रायल कर चुका है। इन्हें सफल माना जा रहा है। भारत सरकार रक्षा उत्पादों की खरीद के मामले में देसी कंपनियों को तरजीह दे रही है। 2017 में अरुण जेटली की अध्यक्षता वाली रक्षा खरीद परिषद (डीएसी) ने इजराइल और स्वीडन से मिसाइलें खरीदने के बजाए भारत में ही बनी आकाश मिसाइलों पर भरोसा जताया। ये जमीन से हवा में मार करती हैं। इन पर 18 हजार करोड़ का खर्च आएगा।

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