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भारतीय वायुसेना का बेड़ा पड़ा पुराना, चाहिए 400 एयरक्राफ्ट

नौ साल पहले 2007 में एयरफॉर्स ने 189 की जरुरत बताई थी

भारतीय वायुसेना का बेड़ा पड़ा पुराना, चाहिए 400 एयरक्राफ्ट
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नई दिल्ली. एक तरफ जहां रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने एक ऐसे स्वदेशी स्मार्ट एंटी एयरफील्ड वेपन (SAAW) का भारतीय वायुसेना के एयरक्राफ्ट से सफल परीक्षण किया है जो 100 किलोमीटर के दायरे में आने वाले दुश्मन के बंकर्स, रनवेज, एयरक्राफ्ट या अन्य किसी ठिकाने को तबाह करने में सक्षम है तो दूसरी तरफ जनसत्ता में प्रकाशित खबर के मुताबिक, भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों का बेड़ा पुराना पड़ चुका है और करीब 400 नए विमानों की जरुरत है।
इस बीच अच्छी खबर ये है कि भारतीय वायुसेना और नौसेना के लिए मल्‍टीरोल कॉम्‍बेट एयरक्राफ्ट (एमआरसीए) की खरीद को लेकर नए सिरे से शुरुआत होगी। पहले 189 विमानों की मांग थी जो अब बढ़कर 460 हो गई है। इनमें से 400 विमान एयर फॉर्स और 60 नेवी को चाहिए। नौ साल पहले 2007 में एयरफॉर्स ने 189 की जरुरत बताई थी।
एयरफॉर्स सिंगल जेट इंजन विमानों के लिए वैश्विक निविदा जारी कर चुकी है। यह निविदा केंद्र सरकार के मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत जारी की गई है। वहीं नेवी को पांच साल के अंदर 60 टि्वन इंजन शिपबोर्ड फाइटर्स चाहिए। नेवी को देश का पहला स्‍वदेशी निर्मित एयरक्राफ्ट कैरियर (आइएसी 1) दो साल के अंदर मिलेगा। इस बार बोइंग F/A 18 सुपर हॉर्नेट या फ्रांस का राफेल दावेदारी में आगे है। राफेल का तो एयरफॉर्स ने सौदा भी कर लिया है।
वहीं वायुसेना की सिंगल इंजन एयरक्राफ्ट के जिन पर नजरें हैं उनमें अमेरिका का लॉकहीड मार्टिन एफ 16 फाइटिंग फाल्‍कन और स्‍वीडिश कंपनी साब का ग्रिपेन प्रमुख है। एफ 18 बनाने वाली बोइंग ने मेक इन इंडिया के तहत विमान बनाने का प्रस्‍ताव भी रखा है। वहीं राफेल बनाने वाली कंपनी डसॉल्‍ट ने भारत सरकार से कहा है कि उन्‍हें भारतीय जरुरतों का ध्‍यान है और वे जल्‍द ही इस संबंध में प्रस्‍ताव सौंप देंगे। राफेल को भी शिपबोर्ड फाइटर के रूप में तैयार किया गया है।
इसी बीच, एयरफॉर्स सरकार से सरकार के बीच डील के तहत 36 राफेल खरीद रही है। इसके तहत अनुबंधात्‍मक पेमेंट के तहत नवंबर में 15 प्रतिशत रकम दे दी गई। माना जा रहा है कि छह एयरक्राफ्ट का पहला बैच 2019 तक आ जाएगा हालांकि भारत ने इस टाइमलाइन को कम करने को कहा है।
नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा ने हाल ही में कहा कि नेवी ने लाइट कॉम्‍बेट एयरक्राफ्ट के स्‍वदेशी नवल वेरियंट को कम पावर के चलते नहीं लिया है। हालांकि उन्‍होंने यह नहीं बताया कि नेवी की क्‍या जरुरत है लेकिन कहा कि बाजार में इस तरह के विमान कम है। उन्‍होंने उम्‍मीद जताई कि सरकार का अप्रूवल जल्‍द ही आ जाएगा।
एयरक्राफ्ट मिग सीरीज के विमानों की दो स्‍क्‍वाड्रन हर साल गंवा रही है। गौर करने की बात है कि एयरफॉर्स में 189 विमानों की जरुरत है लेकिन साल 2015 में उनके राफेल के अधिग्रहण की प्रकिया को रद्द कर दिया गया। इसके बाद सरकार ने 36 एयरक्राफ्ट की डील की। एयरफॉर्स को आधुनिक करने के लिए 400 विमानों यानि कि 20 स्‍कवाड्रन की जरुरत है। एयरफॉर्स की एक स्‍कवाड्रन में 18 एयरक्राफ्ट लड़ाकू ऑपरेशन और दो ट्रेनिंग के लिए होते हैं। वहीं कम से कम तीन को रखरखाव व खराबी के चलते अतिरिक्‍त रखा जाता है।
भारत में सैन्‍य उपकरणों की खरीद में पांच से सात साल लगते हैं। नए लड़ाकू विमानों की खरीद प्रकिया में इसका ध्‍यान रखना होता है। रक्षा मंत्रालय के पास 1970 के दशक के 100 जगुआर विमानों के ताकतवर हनीवेल इंजन और बेहतर वैमानिकी के साथ अपग्रेड करने का प्रस्‍ताव भी पड़ा है। यह प्रस्‍ताव पास होने पर इन विमानों की उम्र 10 से 15 साल तक बढ़ जाएगी।
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