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World Population Day 2019 : बढ़ती जनसंख्या के कारण

World Population Day 2019 विश्व जनसंख्या दिवस 2019 / विश्व जनसंख्या दिवस (World Population Day) 11 जुलाई 2019 (11 July 2019) यानी गुरुवार (Thursday) को भारत (India) समेत विश्वभर में मनाया जाएगा। जनसंख्या दिवस के मौके पर स्वास्थ्य विभाग (Health Department) की और से विभिन्न कार्यक्रम आयोजन किए जाते हैं और रैलियां (Rallies) भी निकाली जाती हैं।

World Population Day 2019 : बढ़ती जनसंख्या के कारण
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World Population Day 2019 Reason To Growing Population

World Population Day 2019 विश्व जनसंख्या दिवस 2019 / विश्व जनसंख्या दिवस (World Population Day) 11 जुलाई 2019 (11 July 2019) यानी गुरुवार (Thursday) को भारत (India) समेत विश्वभर में मनाया जाएगा। जनसंख्या दिवस के मौके पर स्वास्थ्य विभाग (Health Department) की और से विभिन्न कार्यक्रम आयोजन किए जाते हैं और रैलियां (Rallies) भी निकाली जाती हैं। इस दिन प्रदर्शनी लगाकर कर लोगों को छोटा परिवार रखने का संदेश दिया जाता है। बता दें कि हर साल 11 जुलाई (11 July) को विश्व जनसंख्या दिवस (Population Day) पूरे विश्व (All Word) में जनसंख्या मुद्दे (Population Issue) की ओर लोगों की जागरुकता को बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र (UN) विकास कार्यक्रम की संचालक परिषद के द्वारा वर्ष 1989 में जनसंख्या दिवस पहली बार शुरुआत की गई थी। जानकारी के लिए आपको बता दें कि जनसंख्या वृद्धि एक अवांछनीय स्थिति को प्रदर्शित करता है जहां जनसंख्या उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों से कई गुना अधिक बढ़ गई है। वर्तमान में विश्व में सात अरब से अधिक लोग निवास करते है उनमे चीन सबसे अधिक जनसंख्या वृद्धि वाले देश के रूप में लिस्ट में सबसे ऊपर है इसके बाद दूसरी लिस्ट में भारत का नाम शामिल है। जनसंख्या में बढ़ोत्तरी, विश्व में अविकसित, गरीब और विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था में बाधा बनती है।


बढ़ती जनसंख्या के कारण

* बढ़ती जनसंख्या के कारण का प्रमुख कारण है जन्म दर का प्रतिशत मृत्यु दर से अधिक होना। लेकिन हमने मृत्यु दर के प्रतिशत को तो सफलतापूर्वक कम दर दिया है पर यही कार्य जन्म दर के बारे में नहीं किया जा सकता।

* विभिन्न जनसंख्या नीतियों और अन्य उपायों से प्रजनन दर कम तो कम हो गई है। लेकिन यह अन्य देशों के मुकाबले बहुत ज्यादा है।

बाल विवाह

वैसे तो कानूनी तौर पर लड़की की शादी की उम्र 18 साल और लड़के की 21 साल है, लेकिन फिर भी जल्दी शादी कर दी जाती है। जो कि हमारे देश की प्रमुख सामाजिक समस्याओं में से एक है। आज भी उस उम्र में लड़कों और लड़कियों की शादी कर दी जाती है जब वे पारिवारिक जिम्मेदारियों को संभालने के लिए सामाजिक, शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार नहीं होते हैं।

बढ़ती जीवन प्रत्याशा

रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत में औसत वार्षिक जन्म दर 1951-61 में 42 प्रति हजार थी पर 2011 में उसमे आठ प्रति हजार की कमी आई और 2001-2011 में 8.5 की गिरावट दर्ज की गई, जो 1901-1911 में 42.6 थी। चूंकि भारत में मृत्यु दर तेज गति से नीचे आ गई है, जिस कारण देश में जनसंख्या दर बहुत तेजी से बढ़ने लगी है।


पारिवार नियोजन की कमी

देश में 2010-11 की गर्भपात की संख्या को जोड़ा जाए तो भारत में जन्म की अनुमानित संख्या के साथ 6.20 लाख है। बताया गया है कि इस उम्र में, एक महिला, औसत पर, 15 से 45 साल के आयु वर्ग में किसी भी वक्त गर्भवती हो जाती है। ये सब यह सब इसलिए होता है क्योंकि लोग परिवार नियोजन के अनेक फायदों और समाज पर अधिक जनसंख्या के दुष्प्रभावों के बारे में जागरुक नहीं हैं।

शिक्षा की कमी

पारिवारिक नियोजन की विफलता बड़े पैमाने पर अशिक्षा से सीधे संबंध रखता है। जो उपरोक्त वर्णित बाल विवाह, महिलाओं की निम्न स्थिति, उच्च बाल-मृत्यु दर आदि में भी अपना योगदान देती देता है। अशिक्षित परिवार बढ़ती जनसंख्या दर के कारण होने वाली समस्याओं को समझने में असक्षम हैं। वे जनसंख्या को नियंत्रित करने, गर्भ निरोधकों और जन्म नियंत्रण उपायों के उपयोग के विभिन्न तरीकों के बारे में कम से कम जानते हैं।

गरीबी और निरक्षरता

देश में तेजी से आबादी बढ़ने का कारण गरीबी और निरक्षरता भी है। क्योंकि गरीब परिवार के लोगों के जहन में एक बात होती है कि परिवार में जितने अधिक लोग होने उतने कमाने वाले होंगे। जबकि कुछ लोग का यह मानना है कि बुढ़ापे में देखभाल करने के लिए भी बच्चों का होना आवश्क होता है। शिक्षित न होने की वजह से भारत में लोग गर्भ निरोधकों और जन्म नियंत्रण विधियों के इस्तेमाल में पीछे है। निरक्षरता भी आबादी बढ़ने का एक अन्य कारण है।

अवैध प्रवासी

सबसे आखिरी में हम इस तथ्य को नहीं नकार सकते कि बांग्लादेश, नेपाल से अवैध प्रवासियों की लगातार वृद्धि से जनसंख्या घनत्व में बढ़ोत्तरी हुई है।

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