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पूरा विश्व मंदी की चपेट में, भारत की जीडीपी पांचवीं सबसे तेज बढ़ती जीडीपी

भारत में आर्थिक मंदी (Slow Economy) से निपटने के लिए मोदी सरकार (Modi Goverment) लगातार कड़े फैसले ले रही है। लेकिन पूरे विश्व में आर्थिक मंदी के कारण अर्थव्यवस्था रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। इसके बावजूद भारत विश्व की पांचवीं सबसे तेज बढ़ती जीडीपी (GDP) है।

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World Economy Slowdown India GDP fifth fastest growing

भारत में आर्थिक मंदी (World Economy Slowdown) से निपटने के लिए मोदी सरकार (Modi Govt) लगातार कड़े फैसले ले रही है। लेकिन आर्थिक मंदी सिर्फ भारत में ही है नहीं बल्कि पूरा विश्व इसकी चपेट में है। इसके बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था (Indian Economy) अन्य देशों के मुकाबले बेहतर स्थिति में है। भारत अब विश्व की पांचवी तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। चीन, वियतनाम, मिस्र और इंडोनेशिया के बाद भारत की अर्थव्यवस्था सबसे तेजी से बढ़ रही है।

विश्व में आर्थिक मंदी का दौर

अगर भारत के अलावा बात करें अन्य देशों की अर्थव्यवस्था की तो वहां भी आर्थिक मंदी का दौर चल रहा है। दुनिया के कई देश वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी की ओर बढ़ रहे हैं। विश्व में आर्थिक मंदी को लेकर भारत के पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन पहले ही घोषणा कर चुके थे कि दुनिया में एक बार फिर आर्थिक मंदी का दौर आने वाला है। इससे पहले साल 2008 में भारत में आर्थिक मंदी का दौर आया था। उस वक्त यूपीए सरकार ने मंदी के दौर में कई कड़े फैसले लिए और देश की आर्थिक स्थिति से ऊपर उठाया। इस विश्व मंदी के पीछे कई कारण हैं।

1. अमेरिका चीन टैरिफ वॉर- इस वक्त विश्व आर्थिक मंदी के लिए अमेरिका और चीन के बीच चल रही ट्रेड वॉर भी जिम्मेदार है। चीन समेत कई देशों पर अमेरिका ने स्टीप पर 25 फीसदी शुल्क लगा दिया। बीजिंग पर एक अघोषित मुद्रा के साथ अमेरिकी सामान को कम किया गया।


2. अमेरिकी आर्थिक मंदी- डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता संभालते ही विरासत में अर्थव्यवस्था मिली। बीते साल अमेरिका में अमेरिकी केंद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व ने कई चीजों में आई मंदी से ऊपर उठाने के लिए ब्याज दरों में वृद्धि करने के लिए प्रेरित किया गया।

3. जर्मनी, चीन और ब्रिक्स में आर्थिक मंदी- इन दिनों जर्मनी अर्थव्यवस्था में भारी मंदी का तौर चल रहा है। दूसरी तिमाही के बाद तीसरी तिमाही में सबसे बड़ी गिरावट आई। जर्मनी मशीन टूल्स, औद्योगिक उपकरण और कारों की बहुत बिक्री करता है। ऐसे में अगले साल बड़े पैमान पर बदलाव कर चीन से अपनी रिकवरी करने पर निर्भर रहेगा।

चीन में औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर 4.8 फीदसी है जो 30 साल के निचले स्तर पर है। अर्थव्यवस्था विनिर्माण से सेवाओं में बदलाव के साथ और अधिक आत्मनिर्भर बने। जिसको लेकर चीन लगातार काम कर रहा है। राज्य के उद्योगों ने भारी ऋण लिया है लेकिन नहीं चुका सके।

दुनिया के सबसे बड़े व्यापारिक ब्लॉक ब्रिक्स भी आर्थिक मंदी के दौर में है। ब्रिटेन से अलग होने के बाद ब्रिक्स में निवेश और जीडीपी विकास को नुकसान पहुंचा है। ब्रिटेन फ्रांस के बाद दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।

विपक्ष ने साधा है निशाना

भारत की जीडीपी में गिरावट के बाद 5 फीसदी पर आने के बाद विपक्ष ने जमकर निशाना साधा है। विपक्ष ने कहा कि ये 6 वर्षों में सबसे धीमी है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, उपभोक्ताओं मांग और निजी निवेश नीचे गिर रहे हैं। वहीं बीते साल अप्रैल-जून 2018 में भारत की आर्थव्यवस्था 8 प्रतिशत दर्ज की गई थी।

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