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विश्व बालश्रम निषेध दिवस 2019: जानिए भारत में कितनी विकराल है यह समस्या, क्या कहता है संविधान?

विश्व बालश्रम निषेध दिवस (World Day Against Child Labour) प्रत्येक वर्ष 12 जून को मनाया जाता है। भारत में भी बाल शोषण, बाल श्रम और बाल व्यापार एक बड़ी समस्या बनी हुई है। आर्थिक तंगी और भुखमरी बाल व्यापार और बाल श्रम के लिए संजीवनी का काम करती है। बालश्रम की समस्या को समाप्त करने के लिए देश की केंद्र सरकार ने कदम उठाए हैं।

विश्व बालश्रम निषेध दिवस 2019: जानिए भारत में कितनी विकराल है यह समस्या, क्या कहता है संविधान?

विश्व बालश्रम निषेध दिवस (World Day Against Child Labour) प्रत्येक वर्ष 12 जून को मनाया जाता है। भारत में भी बाल शोषण, बाल श्रम और बाल व्यापार एक बड़ी समस्या बनी हुई है। आर्थिक तंगी और भुखमरी बाल व्यापार और बाल श्रम के लिए संजीवनी का काम करती है। बालश्रम की समस्या को समाप्त करने के लिए देश की केंद्र सरकार ने कदम उठाए हैं।

भारतीय संविधान के तहत 23 खतरनाक उद्योगों में बच्चों द्वारा काम करना प्रतिबंधित है। साल 1986 में केंद्र सरकार ने बालश्रम निषेध और नियमन अधिनियम पारित किया। जिसके तहत बालश्रम तकनीकी सलाहकार समिति नियुक्त की गई। समिति के मुताबिक खतरनाक उद्योगों में बच्चों की नियुक्ति प्रतिबंधित है। 1987 में राष्ट्रीय बालश्रम नीति बनाई गई थी।

वर्तमान समय में पूरी दुनिया में 215 मिलियन बच्चे अभी भी बालश्रम में लगे हैं। भारत में भी इस समस्या ने विकराल रूप लिया है, यहां करोड़ों बच्चे अभी भी इस काम में जुड़े हैं।

आइए जानते हैं भारत में बालश्रम को लेकर महत्वपूर्ण बातें-

संविधान के भाग 3 में अनुच्छेद 12 से 30 तक एवं 32 से 35 में मौलिक अधिकारों का वर्णण किया गया है। शोषण के विरूद्ध अधिकार, मानव तस्करी, बेगार एवं जबरन श्रमिकों को प्रतिबंधित करता है। जबकि 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को खतरनाक काम-धंधों में लगाना तथा मजदूरी कराने को अपराध की श्रेणी में रखा जाता है।

साल 1949 में सरकार द्वारा सरकारी विभागों समेत अन्य सभी क्षेत्रों में श्रमिकों के कार्य करने की न्यूनतम आयु 14 वर्ष निर्धारित की गई। वर्ष 1979 में बाल श्रम समस्याओं से संबंधित अध्ययन हेतु सरकार ने गुरुपादस्वामी समिति का गठन किया, जिसके सुझाव पर बालश्रम अधिनियम 1986 लागू किया गया।

यह पहला विस्तृत कानून है, जो 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को व्यवस्थित उद्योगों एवं अन्य कठिन औद्योगिक व्यवसायों जैसे बीड़ी, कालीन, माचिस, आतिशबाजी आदि के निर्माण में रोजगार देने पर प्रतिबंध लगाता है। बावजूद इसके हमारे देश में बालश्रमिकों की संख्या आज भी करोड़ों में है।

संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा निर्धारित सतत विकास लक्ष्य 8 के अंतर्गत 8.7 में भी 2025 तक बाल मजदूरी को पूरी तरह से ख़त्म करने का संकल्प लिया गया।

बाल श्रम के प्रति विरोध एवं जगरूकता फैलाने के मकसद से हर साल 12 जून को बालश्रम निषेध दिवस भी मनाया जाता है। लेकिन इन सबके बावजूद सच्चाई यही है कि बाल श्रम निरंतर जारी है।

नोबल पुरुस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी का मानना है कि सामूहिक कार्यों, राजनीतिक इच्छा शक्ति, पर्याप्त संसाधन और वंचित बच्चों के प्रति पर्याप्त सहानुभूति से ही बालश्रम को समाप्त किया जा सकता है। जिस दिन हम एक गरीब के बच्चे के साथ भी अपने बच्चों की तरह व्यवहार करने लगेंगे, बाल श्रम स्वतः ही समाप्त हो जाएगा।

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