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आखिर क्या है फतवा, जो बात-बात पर हो जाता है जारी- जानें फ़तवा की कहानी

समाचार चैनलों और अखबार के पन्नों पर आए दिन फतवा को लेकर खबर रहती है। कभी अंग्रेजी गाना न सुनने तो कभी किसी महिला के दूसरे धर्म शादी करने को लेकर मौलवी व इमाम के फतवे की चर्चा शुरू हो जाती है। आखिर फतवा क्या है जो बात बात पर जारी हो जाता है।

आखिर क्या है फतवा, जो बात-बात पर हो जाता है जारी- जानें फ़तवा की कहानी
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What is The Fatwa History Of Fatwa In Hindi Fatwa Story

समाचार चैनलों और अखबार के पन्नों पर आए दिन फतवा को लेकर खबर रहती है। कभी अंग्रेजी गाना न सुनने तो कभी किसी महिला के दूसरे धर्म शादी करने को लेकर मौलवी व इमाम के फतवे की चर्चा शुरू हो जाती है। इन दिनों भी फतवा के दो मामले चल रहे हैं। पहला मामला टीएमसी सांसद नुसरत जहां को लेकर है तो दूसरा कश्मीर की बॉलीवुड अदाकारा जायरा वसीम को लेकर। फिलहाल इन मुद्दों को तो आप जानते हैं। आखिर फतवा क्या है जो बात बात पर जारी हो जाता है।

पहले तो आप ये जान लीजिए कि फतवा कोई कानून नहीं है जिसे पालन ही किया जाए। फतवा महज आम राय है। जो अपने आप नहीं दी जाती बल्कि इसके लिए लोग मुफ्ती के पास जाते हैं। सरल शब्दों में कहें तो इंसान अपनी समस्या लेकर मुफ्ती के पास जाता है।



धर्मगुरू उनकी समस्या सुनकर कुरान, हदीस और शरिया कानून के तहत उसे निदान बताता है। उनके द्वारा दी गई जानकारी को मानना या न मानना उसके हाथ में है जो धर्मगुरू के पास गया था।

फतवा कोई ऐसा फरमान नहीं है जो आपके अधिकार छीन ले। पैगम्बर मुहम्मद साहब ने अपनी राय दी, लेकिन कहीं भी ऐसा उल्लेख नहीं मिलता कि उन्होंने अपनी बात मनवाने के लिए किसी पर जोर डाला हो।

कुरान और शरिया कानून में भी ऐसा फतवा को लेकर कुछ ऐसा ही उल्लेख है। फतवा को एक सलाह भी कहा जाए तो गलत नहीं होगा। क्योंकि यह तभी दी जाती है जब कोई मांगता है।


एक सवाल यह भी है कि आखिर फतवा जारी करने का अधिकार किसके पास है? बता दें कि जिसे इस्लाम, कुरान, हदीस और शरिया कानून की पूरी जानकारी है वही फतवा जारी कर सकता है।

दिल्ली की जामा मस्जिद में बैठे इमाम साहब भले ही टीवी, अखबार में छाए रहे पर उनके पास फतवा जारी करने का अधिकार नहीं है। फतवा जारी करने के लिए एक अथॉरिटी होती है। जो लिखित में फतवा जारी करती है। साथ ही अपनी वेबसाइट पर भी अपलोड करती है।

मस्जिद का मौलवी अगर किसी बात पर अपना पक्ष रख रहा है तो वह उसका पर्सनल है उसे फतवा नहीं कहा जाता। लेकिन वर्तमान स्थिति ऐसी हो गई है कि कोई मौलवी भी कुछ बोला तो उसे फतवा मान लिया जाता है।

टीएमसी सांसद नुसरत जहां द्वारा निखिल जैन से शादी करने के बाद मंगलसूत्र पहनना और सुन्दूर लगाने के मामले पर भी फतवा जारी होने की अफवाह फैलाई गई। पर वह सिर्फ और सिर्फ अफवाह रही थी।

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