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मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने की औपचारिक शुरूआत, अब पढ़ाई में नहीं होगी कोई दिक्कत

लॉकडाउन का असर नौनिहालों के पठन-पाठन पर न पड़े इस उद्देश्य से केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने विद्यादान-2 की शुरूआत की।

मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने की औपचारिक शुरूआत, अब पढ़ाई में नहीं होगी कोई दिक्कत
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कोरोना के कारण देशभर में चल रहे लॉकडाउन का असर नौनिहालों के पठन-पाठन पर न पड़े इस उद्देश्य से केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने बुधवार को विद्यादान-2 की शुरूआत की। बच्चों को डिजिटल पाठ्यक्रमों से जोड़ने की पहल पहले भी मंत्रालय समय-समय पर करता रहा है लेकिन अभी विशेष समय है। लगभग हर शिक्षण संस्थानों, कोचिंग क्लासेस का पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढाया जा रहा है।

इससे जो बच्चे या उनके माता-पिता अब तक इस व्यवस्था से किन्हीं कारणों से भी दूर थे, अब वे इस सिस्टम को बखूबी समझने लगे हैं। या यूं कहें कि काफी हद तक रच बस गए हैं। इसी का फायदा उठाते हुए मानव संसाधन मंत्री ने विद्यादान-2 के माध्यम से विश्वस्तरीय गुणवत्तापूर्ण डिजिटल पाठ्य सामग्री सभी को मुफ्त उपलब्ध हो, इसका एक और भगीरथ प्रयास करते नजर आए। इस योजना की शुरूआत मंगलवार को ही होनी थी लेकिन अप्रत्याशित कारणों से इसे एक दिन टाला गया था।

इस अवसर पर निशंक ने बताया कि विद्यादान एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है जिसके तहत विभिन्न शिक्षाविदों और संगठनों को पाठ्यक्रम के अनुसार ई-लर्निंग सामग्री विकसित करने और इसमें योगदान के लिए जोड़ा जाएगा। उन्होंने ऐसे सभी शिक्षाविदों का आह्वान करते हुए कहा कि जो भी देश के नौनिहालों के बेहतर भविष्य के लिए ई-लर्निंग सामग्री विकसित करने में अपना योगदान दें।

शिक्षा से जुड़े जितने भी सुझाव ई-लर्निंग के लिए आएंगे उन्हें विशेषज्ञों का एक पैनल अपनी कसौटी पर कसेगा। उसमें से चुनिंदा सामग्रियों को दीक्षा-एप के माध्यम से उपयोग के लिए जारी किया जाएगा। इससे देश के कोने-कोने में बसे उन सभी विद्यार्थियों को पठन-पाठन की सुविधा बहाल रखने में मदद होगी। राज्यों को इसमें अपने हिसाब से विद्यादान कार्यक्रम शुरू करने की छूट दी गई है।

भाषा-भाषाई विविधताओं के कारण राज्य सरकारें अपनी सुविधानुसार पाठ्य सामग्रियों को सुनिश्चित कर सकती हैं। पाठ्य सामग्री सभी शिक्षा विभागों, राज्य एवं केंद्रीय शिक्षा बोर्ड, सरकारी और निजी विद्यालयों के उपयोग के लिए उपलब्ध होगी। उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों को भी तैयार किए जा रहे सामग्रियों का लाभ मिले, इसकी कोशिश की जा रही है।

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