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यूपी में हर साल शहीद होते हैं सैकड़ों पुलिसवाले, अभी तक सिर्फ इतने अपराधियों को मिली है सजा

देशभर में सबसे ज्यादा अपराध उत्तरप्रदेश में होते हैं। मर्डर से लेकर रेप तक की घटनाओं में उत्तरप्रदेश नंबर वन पर है। 2018 के एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक, देशभर में 50 लाख 74 हजार 634 क्राइम हुए थे।

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प्रतीकात्मक फोटो

देशभर में सबसे ज्यादा अपराध उत्तरप्रदेश में होते हैं। साथ ही सबसे ज्यादा पुलिसवाले भी यूपी में ही शहीद होते हैं, लेकिन उसके मुताबिक बहुत कम अपराधियों को सजा मिल पाती है। बता दें कि सिर्फ 2018 में उत्तरप्रदेश में केवल 6 प्रतिशत अपराधियों को ही सजा हो पाई है।

2018 में यूपी में शहीद हुए 174 पुलिसवाले

देशभर में इस साल कुल 555 पुलिसवालों की जान गई है। वहीं साल 2018 के आंकड़ों की बात करें तो देशभर में 2 हजार 408 पुलिसवाले घायल हुए थे, जिसमें सिर्फ यूपी के 174 पुलिसवाले शामिल थे। इसके अलावा 2018 में यूपी के कुल 93 पुलिसवाले शहीद हुए थे और 2017 में 70 पुलिसवालों की जान गई थी। बता दें कि देशभर में सबसे ज्यादा पुलिसवालों की जान सिर्फ उत्तरप्रदेश में जाती है।

उत्तरप्रदेश में सबसे ज्यादा क्राइम रेट

देशभर में सबसे ज्यादा अपराध उत्तरप्रदेश में होते हैं। मर्डर से लेकर रेप तक की घटनाओं में उत्तरप्रदेश नंबर वन पर है। 2018 के एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक, देशभर में 50 लाख 74 हजार 634 क्राइम हुए थे। इसंमें से 11.5 प्रतिशत यानी 5 लाख 85 हजार 157 क्राइम सिर्फ उत्तरप्रदेश में रिकॉर्ड किए गए थे।

वहीं अगर मर्डर की घटनाओं की बात करें तो, 2018 में देश में कुल 29 हजार 17 मर्डर हुए थे, जिसमें से 4 हजार 18 मर्डर सिर्फ उत्तरप्रदेश में दर्ज हुए थे। इसके अलावा देशभर में हुई एक लाख किडनैपिंग में सिर्फ यूपी के 21 हजार मामले थे।

महिलाओं के खिलाफ किए गए अपराधों में भी यूपी नंबर वन पर है। सिर्फ 2018 में महिलाओं के खिलाफ 59,445 मामले यूपी में दर्ज किए थे। वहीं रेप के मामलों में यूपी तीसरे नंबर पर है। 2018 में सबसे ज्यादा रेप के मामले मध्यप्रदेश, फिर राजस्थान और फिर उत्तरप्रदेश में दर्ज किए गए थे।

सिर्फ 6 प्रतिशत अपराधियों को सजा

देशभर में सबसे ज्यादा अपराध उत्तरप्रदेश में होते हैं, लेकिन सबसे कम अपराधियों को सजा मिलती है। 2018 में 4 लाख 27 हजार 174 अपराधियों को ट्रायल के लिए भेजा गया था, जिसमें सिर्फ 24 हजार 215 अपराधियों को ही सजा मिली थी। कुछ सबूतों की कमी से छूट गए थे , तो कुछ को अदालत से ही बरी कर दिया गया था।

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