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Budget 2019: क्या आप जानते हैं बजट से जुड़े इन Terms का मतलब

Budget 2019-20 / मोदी सरकार 2.0 (Modi Government 2.0) को पहला आम बजट 2019-20 (Union Budget 2019-20) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) 5 जुलाई 2019 को पेश करेंगी।

Budget 2019: क्या आप जानते हैं बजट से जुड़े इन Terms का मतलब
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Union budget 2019 Important Terms Budget Meaning In Hindi

Budget 2019-20 / मोदी सरकार 2.0 (Modi Government 2.0) को पहला आम बजट 2019-20 (Union Budget 2019-20) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) 5 जुलाई 2019 को पेश करेंगी। वित्तवर्ष 2019-20 (financial year 2019-20) के बजट (Budget) पर देश के लोगों की नजरे हैं, इससे हर किसी को कुछ न कुछ उम्मीदें हैं। बजट को आप बारिकी से समझ सकें इसके लिए जरूरी है कि आप बजट से जुड़ें कुछ शब्दों को अच्छी तरह समझ लें। तो चलिए आपको बताते हैं बजट से कुछ खास शब्दों के मतलब के बारे में, जिन्हें लोग कम ही जानते हैं।

बजट (Budget)

बता दें कि जिस तरह से हम अपने घर का बजट बनाते हैं ठीक उसी तरह से वित्तीय वर्ष में सरकार द्वारा अर्जित किए गए रेवेन्यू और कुल खर्च की विस्तृत जानकारी दी जाती है उसे बजट कहते हैं। कि इस साल कहां पर कितना खर्च करना है, आमदनी क्या होगी आदि। आम बजट (Aam Budget) में सरकार की आमदनी और प्रस्तावित योजनाओं पर होने वाले खर्च की डिटेल होती है। लेकिन इसमें कर्ज शामिल नहीं होता है।

फाइनेंस बिल (Finance bill)

आम बजट को पेश करने के के तुरंत बाद बिल पास किया जाता है। जिसे फाइनेंस बिल (Finance bill) या वित्त विधेयक कहते हैं। बजट में नए टैक्स, टैक्स हटाने, टैक्सों में सुधार करना आदि जैसे काम शामिल रहते हैं।

राजकोषीय नीति (Fiscal Policy)

सरकार आमदनी और खर्च स्तरों को बांटने के लिए विभिन्न प्रकार के कार्य करती है। बजट के जरिए वित्तीय नीति को लागू किया जाता है और इसी के द्वारा सरकार अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।

फिस्कल कंसॉलिडेशन (Fiscal consolidation)

फिस्कल कंसॉलिडेशन का उद्देश्य सरकार घाटे और कर्ज को कम करना होता है।

रेवेन्यू डेफिसिट (Revenue Deficit)

रेवेन्यू डेफिसिट (Revenue Deficit) या राजस्व घाटा, यानी जब कुल राजस्व और कुल व्यय के बीच जो अंतर होता है उसे रेवेन्यू डेफिसिट कहते हैं। यह केंद्र सरकार (Central Government) की कुल कमाई यानी आमदनी और खर्च के बीच अंतर होता है।

एग्रीगेट डिमांड (Aggregate Demand)

किसी अर्थव्यवस्था में सामानों और सेवाओं की कुल संख्या को एग्रीगेट डिमांड कहते हैं।

भुगतान देय (Balance of payment)

विदेश विनिमय बाज़ार (Foreign exchange market) में किसी देश की मुद्रा की कुल मांग और आपूर्ति (Supply) के बीच के फर्क को भुगतान देय (Balance of payment) कहा जाता है।

डायरेक्ट टैक्स (Direct tax)

बता दें कि किसी भी व्यक्ति या किसी भी संस्थान की आय पर जो टैक्स लगते हैं, वह टैक्स डायरेक्ट टैक्स की श्रेणी में आते हैं। इनमें इनकम टैक्स, कॉर्पोरेट टैक्स और इनहेरिटेंस टैक्स शामिल हैं।

इनडायरेक्ट टैक्स (Indirect tax)

इनडायरेक्ट टैक्स (Indirect tax) या अप्रत्यक्ष कर वह टैक्स होत हैं जिसे सीधे तौर पर जमा नहीं किया जाता है, लेकिन यह टैक्स आपसे सामानों और सेवाओं के लिए वसूला जाता है। साल 2018 जुलाई में टैक्स का नया स्ट्रक्चर जीएसटी पेश किया गया। देश में तैयार, आयात व निर्यात किए गए सभी सामनों पर जो टैक्स लगते हैं उन्हें इनडायरेक्ट टैक्स या अप्रत्यक्ष कर कहते हैं। इनमें सीमा शुल्क और उत्पाद शुल्क भी शामिल है।

इनकम टैक्स (Income Tax)

इनकम टैक्स (Income Tax) सैलरी, निवेश, ब्याज जैसे अनेकों साधनों से होने वाली कमाई अलग-अलग स्लैब के तहत टैक्सेबल (Taxable) होती है। यानी की जो टैक्स व्यक्ति की कमाई यानी इनकम पर लिया जाता है उसे इनकम टैक्स कहते हैं।

ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (Gross Domestic Product) (जीडीपी)

ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (GDP) में निजी खपत, सरकारी निवेश, अर्थव्यवस्था में सकल निवेश,सरकारी खर्च और नेट फॉरन ट्रेड (आयात और निर्यात का फर्क) शामिल होता है। किसी देश में जीवन स्तर (Standard of living) को मापने के लिए जीडीपी को पैमाना माना जाता है।

मौद्रिक नीति (Monetary policy)

मौद्रिक नीति (Monetary policy) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसकी मदद से आरबीआई (RBI) अर्थव्यवस्था में पैसे की आपूर्ति को नियंत्रित करता है। मौद्रिक नीति में महंगाई पर लगाम, रोजगार के अवसर, कीमतों में ठहराव और टिकाऊ आर्थिक विकास दर का लक्ष्य हासिल करना शामिल होता है। अर्थव्यवस्था में नकदी की आपूर्ति पर बैंकों का पैसा रिजर्व रेशियो या ओपन मार्केट ऑपरेशन से डायरेक्ट असर डाला जा सकता है। रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट के जरिए कर्ज की लागत को बढ़ाया और घटाया जा सकता है।

राष्ट्रीय कर्ज (National debt)

सराकर बजट के घाटों को पूरा करने के लिए जो कर्ज लेती है उसे राष्ट्रीय कर्ज (National debt) कहते हैं। यानी केंद्र सरकार (Central Govt) के राजकोष में शामिल कुल कर्ज राष्ट्रीय कर्ज कहलाता है।

सरकारी उधार (Government lending)

सरकारी उधार वह धन है, जिसे केद्र सरकार सार्वजनिक सेवाओं पर होने वाले खर्च को फंड करने के लिए उधार लेती है।

विनिवेश (Disinvestment)

सार्वजनिक उपक्रमों में केंद्र सरकारी हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया को विनिवेश (Disinvestment) कहते हैं।

इन्फ्लेशन (Inflation)

कुछ समय के लिए जब किसी अर्थव्यवस्था में सामानों और सेवाओं की कीमतों का दाम बढ़ जाता है, तो उसे इन्फ्लेशन (महंगाई) कहते हैं। जब आम वस्तुओं के दाम बढ़ते हैं, तभी मुद्रा की प्रति यूनिट से कुछ सामान और सेवाएं खरीदी जाती हैं। भारत में अभी होलसेल प्राइस इंडेक्स (डब्ल्यूपीआई) और कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (सीपीआई) के जरिए महंगाई को मापा जाता है।

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